संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। धान की फसल में आई बीमारी और उससे हुए भारी नुकसान का सर्वे न करवाए जाने को लेकर गांव शिमला के किसानों में गहरी नाराजगी है। इसी को लेकर गुरुवार को गांव के बस स्टैंड पर भारतीय किसान यूनियन की बैठक हुई।
बैठक में कलायत ब्लॉक प्रधान जिले सिंह मोर ने बताया कि बीज की गुणवत्ता में कमी और बारिश न होने के कारण गांव शिमला की 80 प्रतिशत से अधिक धान की फसल बर्बाद हो चुकी है। किसानों का कहना है कि वे पहले ही 1 लाख रुपये से अधिक का खर्च कर चुके हैं, जिसमें 80 हजार रुपये प्रति एकड़ चकौता व 30 हजार रुपये से अधिक की लागत शामिल है।
उन्होंने बताया कि गांव के किसानों का एक प्रतिनिधिमंडल 4 अगस्त को उपायुक्त से मिला था, जिन्होंने शीघ्र सर्वे करवाने का आश्वासन दिया था। लेकिन अब तक न तो कोई पटवारी, न तहसीलदार और न ही कृषि विभाग का कोई अधिकारी खेतों में पहुंचा है। किसान हर रोज अधिकारियों की राह तककर लौट जाते हैं। जिले सिंह ने सवाल उठाया कि यदि बीज या दवाइयों में गड़बड़ी है, तो उसकी जिम्मेदारी किसानों की नहीं बल्कि कंपनी या सरकार की बनती है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शुक्रवार को भी उपायुक्त से समाधान नहीं मिला, तो किसान आंदोलन करने को विवश होंगे और इसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
इस अवसर पर जिले सिंह मोर, कृष्ण मोर, रति राम, सरपंच रामचंद्र वाल्मीकि, मास्टर वीरभान, रामचंद्र लोहाट व रामफल सहित कई किसान मौजूद रहे।