संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। एक साधारण ग्रामीण महिला शीतल क्षेत्र के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं। 23 दिसंबर 2025 को किसान दिवस पर हिसार में आयोजित राज्य स्तरीय पशुधन प्रदर्शनी एवं दुग्ध उत्पादन से संबंधित विशेष कार्यक्रम में शीतल को उनके उत्कृष्ट दुग्ध उत्पादन और उच्च नस्ल की भैंसों के सफल पालन के लिए सम्मानित किया गया।
डेयरी क्षेत्र में अनुकरणीय योगदान, अधिकतम दूध उत्पादन तथा ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार की दिशा में प्रेरित करने के लिए उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया। शीतल कैथल के छोटे से गांव चूहड़ माजरा की निवासी हैं। सीमित संसाधनों और पारंपरिक सोच वाले परिवेश के बीच उन्होंने अपने दम पर डेयरी व्यवसाय की शुरुआत की थी।
शुरुआत में उनके पास केवल दो भैंसें थीं, लेकिन अपनी मेहनत, लगन और पशुपालन विभाग की योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर उन्होंने धीरे-धीरे अपने डेयरी फार्म का विस्तार किया। आज उनके पास उच्च नस्ल की छह से आठ भैंसें हैं, जिनसे प्रतिदिन पर्याप्त मात्रा में दूध उत्पादन हो रहा है। बेहतर प्रबंधन और वैज्ञानिक पद्धति अपनाने से उनके डेयरी कार्य में निरंतर वृद्धि हुई है।
खास बात यह है कि शीतल ने यह सफलता अकेले हासिल नहीं की। उन्होंने अपने गांव की 10 महिलाओं को साथ लेकर एक समूह का गठन किया और सामूहिक रूप से दुग्ध उत्पादन का कार्य शुरू किया। इस समूह ने आधुनिक तकनीकों को अपनाया तथा पशुओं के संतुलित आहार, नियमित टीकाकरण और स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया। इसके परिणामस्वरूप दूध की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
हिसार में आयोजित पशुधन प्रदर्शनी के दौरान जब शीतल और उनकी टीम की उपलब्धियों की जानकारी साझा की गई, तो उपस्थित विशेषज्ञों और अधिकारियों ने उनकी सराहना की। कार्यक्रम में उन्हें प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। उनका प्रयास ग्रामीण महिलाओं के लिए आदर्श उदाहरण बन गया है।
उन्होंने यह सिद्ध किया है कि सही दिशा, प्रशिक्षण और दृढ़ निश्चय के साथ गांव की महिलाएं भी आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकती हैं।
शीतल का कहना है कि शुरुआत में कई लोगों ने उन्हें हतोत्साहित किया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने पशुपालन विभाग द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेकर नई तकनीकों को सीखा। उनका मानना है कि उच्च नस्ल की भैंसों का चयन, पौष्टिक आहार और समय पर देखभाल ही अधिक दूध उत्पादन की कुंजी है।
उनकी टीम की महिलाएं अब नियमित आय अर्जित कर रही हैं। जहां पहले वे केवल घरेलू कार्यों तक सीमित थीं, वहीं अब परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इससे गांव में महिलाओं के प्रति सोच में भी सकारात्मक परिवर्तन आया है। कई अन्य महिलाएं भी अब डेयरी व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रेरित हो रही हैं।
शीतल की सफलता यह साबित करती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के असीम अवसर मौजूद हैं। सरकार की योजनाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का लाभ उठाकर महिलाएं न केवल आत्मनिर्भर बन सकती हैं, बल्कि समाज में बदलाव की मिसाल भी बन सकती हैं। आज कैथल की शीतल और उनकी 10 महिलाओं की टीम पूरे जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है। उनका यह सम्मान ग्रामीण महिला सशक्तीकरण और आत्मनिर्भरता का सशक्त प्रतीक है।