संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। नगर में बागवानी पर चमगादड़ों की काली छाया है। समूहों में सक्रिय हुए से प्रणाली व्यापक स्तर पर फल-फूलों को नष्ट कर रहे हैं। चमगादड़ों की संख्या पर नियंत्रण पाना किसानों के लिए कठिन कार्य बना है। किसान रात के समय में ध्वनि यंत्रों व दूसरे संसाधनों से फसलों का चमगादड़ों से बचाव करने में लगे हैं। इसके लिए उन्हें रात भर जागना पड़ रहा है।
हालात ये हैं कि फल-फूलों को तैयार होने से पहले ही चमगादड़ प्राकृतिक आपदा की तरह तहस-नहस कर देते हैं। किसान राजबीर राणा, कपिल, विजय, गौरव और मोनू ने बताया कि चमगादड़ दिन के समय पक्षियों व पशुओं के भय से बाहर नहीं निकलता। इसलिए वे किसी पेड़ या खंडहर भवनों में
छिपे रहते हैं। रात होने पर वे शिकार को निकलते हैं।
प्रदेश मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने राज्य में बागवानी को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न कार्यक्रम गतिमान किए हैं। इसके माध्यम से सरकार ने 2030 तक वर्तमान में कुल फसल क्षेत्र के सात प्रतिशत के बागवानी क्षेत्र को 22 लाख एकड़ करने का लक्ष्य रखा है।
वन विभाग डिप्टी रेंजर महावीर पठानियां ने कहा कि बागवानी करने वाले किसान चमगादड़ों से फल-फूलों के उत्पादन को सुरक्षित रखने के लिए ध्वनि यंत्र का प्रयोग करें। ध्वनि के कारण चमगादड़ छिपने के ठिकानों से बाहर
नहीं निकलते।