कैथल। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े बेटा-बेटी एक समान होने के दावों की पोल खोल रहे हैं। जिले में आज भी एक हजार लड़कों पर 900 लड़कियां ही पैदा हो रही हैं। चिंता की बात ये है कि एक दशक में भी हालात नहीं बदले हैं। वर्ष 2016 में जिले का लिंगानुपात 887 था और अब 10 साल बाद भी आंकड़ा 900 तक ही पहुंच पाया है।
विभाग के अधिकारी केवल आशा वर्करों के भरोसे लिंगानुपात सुधारना चाहते हैं, क्योंकि बैठकों में उन पर सख्ती बरती जाती है कि गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण करें। इसके अलावा विभाग के अधिकारी धरातल पर इसके कारण जानने से अनजान बने हुए हैं। जिले के कई गांव तो ऐसे हैं, जिनका कई साल से रिकाॅर्ड खराब है। वर्ष 2015 में हरियाणा से ही बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का नारा दिया गया था, लेकिन आंकड़े गवाही देते हैं कि आज भी बेटों के मोह में बेटियों को गर्भ में ही खत्म किया जा रहा है।
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बॉक्स
पिछले 10 वर्षों का लिंगानुपात
वर्ष लिंगानुपात
2016 887
2017 900
2018 916
2019 919
2020 922
2021 913
2022 921
2023 920
2024 907
2025 926
2026 900
नोट : ये आंकड़े प्रति एक हजार लड़कों पर लड़कियों के हैं।
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बॉक्स
अलग-अलग गांवों का लिंगानुपात
गांव लिंगानुपात
पाडला 542
गुहला 574
डीग 581
चंदाना 583
सांच 607
बरसाना 617
दयौरा 632
मानस 638
भागल 645
कुराड़ 686
नोट : ये आंकड़े वर्ष 2025 के हैं और प्रति एक हजार लड़कों पर हैं।
घर में पहला बेटा हो गया तो बेटी पैदा नहीं करते, सुरक्षा भी एक वजह : डॉ. संतोष दहिया
एक दशक बाद भी अगर लिंगानुपात में सुधार नहीं हो रहा है, तो इससे साफ पता चलता है कि समाज में बेटा और बेटियों में आज भी फर्क माना जाता है। गिरते लिंगानुपात का बड़ा कारण ये भी है कि घर में अगर पहला बच्चा लड़का हो जाए, तो फिर दूसरा बच्चा पैदा ही नहीं करना चाहते हैं। दूसरा बड़ा कारण लड़कियों की सुरक्षा है। लड़कियों और महिलाओं के प्रति बढ़ते आपराधिक मामलों के कारण भी लोग बेटियां पैदा करने से डरने लगे हैं। - डॉ. संतोष दहिया, राष्ट्रीय अध्यक्ष, सर्वखाप महिला महापंचायत
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वर्जन
पहले के मुकाबले लिंगानुपात में काफी सुधार हुआ है, लेकिन अब पिछले कुछ समय से ये स्थिर हो गया है। विभाग की ओर से लोगों को जागरूक किया जा रहा है। हर गांव में अब स्वास्थ्यकर्मियों को सख्त हिदायत है कि वे हर गर्भवती महिला पर नजर रखें, ताकि कन्या भ्रुणहत्या जैसे अपराध में कमी लाई जा सके।
- डाॅ. संजय मांडले, नोडल अधिकारी, स्वास्थ्य विभाग, कैथल
लोगों को घटते लिंगानुपात को लेकर जागरुक करते स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी। स्वयं