जिले में ब्लैक फंगस का सातवां संदिग्ध केस सामने आया है। मरीज में जैसे ही ब्लैक फंगस के लक्षण पाए जाने की सूचना स्वास्थ्य विभाग को मिली, तो अधिकारियों ने उसे तुरंत जांच के लिए कल्पना चावला अस्पताल करनाल में भेज दिया। वहां जांच के बाद ही संदिग्ध को फंगस होने की पुष्टि की जाएगी और अगर पुष्टि होती है तो मरीज का इलाज भी वहीं से चलेगा। राजौंद क्षेत्र के एक गांव का रहने वाला है 55 वर्षीय व्यक्ति- वीरवार देर रात को मिला यह संदिग्ध व्यक्ति राजौंद क्षेत्र का रहने वाला है, जिसकी आयु 55 वर्ष के करीब है। इससे पूर्व यह व्यक्ति आठ जून को कोरोना संक्रमित भी पाया गया था। संक्रमित मिलने के बाइ उसे शहर के एक निजी अस्पताल में आइसोलेट किया गया था। स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार यह व्यक्ति कोरोना संक्रमित होने के साथ-साथ मधुमेह का मरीज भी बताया गया है। संक्रमित मिलने के बाद से ही व्यक्ति स्टेरॉयड दवाइयों का सेवन भी कर रहा था।
जिले में इससे पहले भी छह संदिग्ध केस पाए जा चुके हैं। इनमें एक महिला भी शामिल है। इससे पूर्व एक व्यक्ति को ब्लैक फंगस होने की पुष्टि भी हुई है, जिसकी मौत हो चुकी है। उस व्यक्ति की मौत के बाद ही रिपोर्ट में विभाग को पता लग पाया कि वह ब्लैक फंगस से पीड़ित था। इस संबंध में सिविल सर्जन डॉ. शैलेंद्र ममगाईं शैली ने कहा कि जिलावासी कोरोना से बचाव के नियमों का पालन करने के साथ-साथ खुद को ब्लैक फंगस से भी बचाएं। कोरोना संक्रमित होने पर अगर कोई व्यक्ति ज्यादा स्टेरॉयड दवाएं लेता है और किसी अन्य बीमारी से पीड़ित है तो उसे ब्लैक फंगस की संभावना ज्यादा रहती है।