ढांड। जमदग्नि ऋषि कुंड जाजनपुर में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा संपन्न हो गई। कथा के समापन पर हवन किया और भंडारे लगाया गया। जहां ग्रामीणों ने हवन में आहुति डाल भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया। कथा वाचक पंडित आचार्य सतबीर नौच ने कथा के आखिरी दिन राजा परीक्षित की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि राजा परीक्षित पांडवों के वंशधर और अर्जुन के पौत्र थे।
राजा परीक्षित को जब इस बात का पता चला कि सात दिनों बाद मृत्यु तक्षक नाग के डंसने से उसकी मृत्यु होगी। परीक्षित ने इन सात दिनों में शुकदेव से श्रीमद्भागवत कथा सुनी। सातवें दिन तक्षक सांप के डंसने से परीक्षित की मृत्यु हो जाती है।
जब उसके पुत्र जनमेजय को मालूम हुआ कि उसके पिता की मृत्यु तक्षक नाग के काटने से हुई है तो उसने नागों से बदला लेने के लिए नाग दाह यक्ष शुरू करवाया। आचार्य ने कहा कि यज्ञ कुंड में पृथ्वी लोक के नाग गिरते जा रहे थे। तभी तक्षक नाग देवराज इंद्र के पास छुप गया। अस्तिक मुनि ने राजा को नाग दाह यज्ञ बंद करने के लिए समझाया और जनमेजय ने यज्ञ रोक दिया। इस प्रकार अस्तिक मुनि ने नागों की प्रजाति को समाप्त होने से बचाया। कहते हैं कि राजा परीक्षित की मृत्यु के बाद से ही कलयुग की शुरूआत होती है।