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Kaithal News: चीका पालिका के सचिव को किया गया निलंबित

Thu, 07 May 2026 12:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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गुहला-चीका। चीका नगरपालिका के सचिव जितेंद्र कुमार को विकास कार्यों में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते निलंबित कर दिया गया है। निलंबन की पुष्टि डीएमसी कैथल कपिल कुमार ने की है, हालांकि उन्होंने मामले के विस्तृत कारणों पर टिप्पणी करने से इन्कार किया।

सचिव के निलंबन के बाद नगरपालिका में हड़कंप का माहौल है और मामले को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। वार्ड नंबर 2 के पार्षद दलबीर सीड़ा ने दावा किया कि उन्होंने लंबे समय से सचिव के खिलाफ कई गंभीर शिकायतें विभाग और विजिलेंस अधिकारियों को दी थीं। उनके अनुसार नगरपालिका का महत्वपूर्ण रजिस्टर नंबर 35 लंबे समय से गायब था, जिसे बार-बार मांगने के बावजूद प्रस्तुत नहीं किया गया।
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सीड़ा का आरोप है कि इस रजिस्टर में विकास कार्यों से जुड़े महत्वपूर्ण रिकॉर्ड दर्ज थे, जिनसे कथित भ्रष्टाचार के मामलों का खुलासा हो सकता था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वार्ड नंबर 2 और 15 में गलियों के निर्माण के नाम पर लाखों रुपये का भुगतान किया गया, जबकि जमीन पर कोई कार्य नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि इस संबंध में विजिलेंस विभाग को शिकायत दी गई थी और जांच के दौरान रिकॉर्ड उपलब्ध कराने में भी कथित तौर पर टालमटोल की गई। इसके अलावा कुछ साइटों के साथ छेड़छाड़ कर सबूत मिटाने के प्रयास किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।

पार्षद ने यह भी आरोप लगाया कि शहर में पौधारोपण और ट्री गार्ड लगाने के नाम पर लाखों रुपये के बिल पास किए गए, जबकि धरातल पर ऐसे कार्य दिखाई नहीं देते। उन्होंने बताया कि इन सभी मामलों को लेकर 12 फरवरी को विभाग के मंत्री विपुल गोयल और एसीएस को लिखित शिकायत भेजी गई थी।

सचिव का पक्ष नहीं आया सामने : निलंबित सचिव जितेंद्र कुमार का पक्ष जानने के लिए कई बार संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। वहीं डीएमसी कपिल कुमार ने केवल निलंबन की पुष्टि की और विस्तृत जानकारी देने से इन्कार किया।
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पार्षद दलबीर सीड़ा बोल यह तो सिर्फ शुरुआत है

पार्षद दलबीर सीड़ा ने कहा कि सचिव का निलंबन केवल प्रारंभिक कार्रवाई है। यदि निष्पक्ष और गहन जांच कराई गई तो चीका नगरपालिका में विकास कार्यों के नाम पर करोड़ों रुपये के घोटाले सामने आ सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई कार्य केवल कागजों में दिखाए गए हैं और वास्तविकता में विकास नहीं हुआ।
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