संवाद न्यूज एजेंसी
गुहला-चीका। हरियाणा को पंजाब से जोड़ने वाला कैथल–पटियाला स्टेट हाईवे इन दिनों अपनी जर्जर हालत के कारण लोगों के लिए बड़ी समस्या बन गया है। करोड़ों रुपये खर्च कर सड़क नेटवर्क मजबूत करने के दावों के बीच यह मुख्य मार्ग बदहाल स्थिति में है।
सड़क पर जगह-जगह बने गहरे गड्ढों के कारण आए दिन हादसे हो रहे हैं और वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यह मार्ग कई जिलों को पंजाब से जोड़ता है, जिस पर प्रतिदिन हजारों हल्के और भारी वाहन गुजरते हैं। बावजूद इसके, लंबे समय से मरम्मत न होने के कारण सड़क की स्थिति बेहद खराब हो चुकी है। हल्की बारिश के बाद हालात और बिगड़ जाते हैं, जिससे गड्ढे और गहरे हो जाते हैं और दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
वाहन चालकों की बढ़ी परेशानी : बस चालक ने बताया कि खराब सड़कों के कारण यात्रा समय भी काफी बढ़ गया है। जो सफर पहले 20 मिनट में पूरा होता था, अब उसमें करीब डेढ़ घंटा लग रहा है। धीरे चलाने पर समय अधिक लगता है और तेज चलाने पर वाहन टूटने व दुर्घटना का खतरा बना रहता है।
लगातार उठ रही मांग, नहीं हो रही सुनवाई : स्थानीय लोगों, सरपंचों और सामाजिक संगठनों द्वारा कई बार इस मार्ग की मरम्मत की मांग उठाई जा चुकी है। हालांकि, एक-दो बार सड़क पर पैचवर्क (कारपेंटिंग) किया गया, लेकिन वह भी अधिक समय तक टिक नहीं पाया।
कार्रवाई की मांग : क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि इस मुख्य मार्ग की जल्द से जल्द मरम्मत करवाई जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
गुहला से खरकां रोड
समाजसेवी राजपाल राणा ने बताया कि गुहला से खरकां तक सड़क की हालत सबसे खराब है। यहां सड़क नाम की कोई चीज नहीं बची, पूरा मार्ग गड्ढों में तब्दील हो चुका है। लोग मजबूरी में कच्चे रास्तों का सहारा ले रहे हैं, लेकिन प्रशासन कोई सुनवाई नहीं कर रहा।
चीका से पिहोवा रोड
हरीगढ़ किंगन निवासी गुरबचन सिंह ने बताया कि चीका से पिहोवा मार्ग सहित शहर में आने-जाने वाली लगभग सभी सड़कें खराब हो चुकी हैं। सड़कों की बदहाली के कारण वाहनों की मरम्मत पर भारी खर्च आ रहा है।
चीका से कैथल रोड
गांव पीड़ल निवासी संदीप संधू ने बताया कि यह सड़क कुछ वर्ष पहले करोड़ों रुपये की लागत से बनाई गई थी, लेकिन अब फिर से जर्जर हो चुकी है। गहरे गड्ढों के कारण कई लोग हादसों में घायल हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि अब आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।