कैथल। पूर्व मुख्य संसदीय सचिव रामपाल माजरा ने सरकार से मांग की है कि सरकार सरपंचों व कर्मचारियों की पुरानी पैंशन बहाली की मांग को पूरा करे। जिन विभागों में चुने हुए प्रतिनिधि या व्यवस्था नहीं हैं। वहां ई-टेंडरिंग से काम करवाना समझ में आता है। पंचायतों में जब चुने हुए प्रतिनिधि हैं तो उन्हें काम करवाने का अधिकार क्यों नहीं दिया जा रहा? सरपंचों पर सरकार को विश्वास करना चाहिए, सरपंच गांव के मौजिज व्यक्ति हैं। सरकार उनका मान-सम्मान बहाल करे। माजरा ने सोमवार को अपने आवास पर पहुंचें सरपंचों से मुलाकात के बाद बातचीत में कहा कि सरपंचों ने उनसे मुलाकात कर उनकी आवाज उठाने के लिए आभार जताया है। उनका मानना है कि चुनाव जीतकर आए प्रतिनिधियों का मान-सम्मान बहाल होना चाहिए। मंत्री देवेंद्र बबली को चाहिए कि वे सरपंचों के हकों की लड़ाई लड़े। माजरा ने यहां तक कहा कि ई-टेंडरिंग भी एक भ्रष्टाचार का बड़ा माध्यम है। एचएसआर जैसे नियमों की अवहेलना कर ठेकेदार माइनस में ठेका लेते हैं। फिर अधिकारियों की मिलीभगत से कमीशनखोरी के बाद मुश्किल से 50 प्रतिशत तक राशि ही खर्च हो पाता है। ई-टेंडरिंग में भारी घपला है।
उन्होंने यह भी कहा कि चंडीगढ़ में सरकार ने कर्मचारियों पर लाठीचार्ज कर व सरपंचों की बात को अनसुना कर सरकार तानाशाही रवैया अपनाए हुए है। कर्मचारियों पर लाठीचार्ज निंदनीय है। सरकार को सरपंचों व कर्मचारियों की पुरानी पैंशन बहाली की मांग को पूरा करना चाहिए। सरकार अपना तानाशाही रवैया छोड़कर जनहित के काम करे।