फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kaithal News: 312 किसानों के खाते में अनुदान के पहुंचे 13 लाख 94 हजार रुपये

Fri, 03 Mar 2023 03:02 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
विज्ञापन
विज्ञापन
जिले में 312 किसानों के खाते में पहुंचे 13.94 लाख रुपये
विज्ञापन


कैथल। अब गन्ने की खेती के साथ साथ अन्य फसलों की भी बिजाई की जा सकती है। इसके लिए सरकार किसानों को अनुदान भी देती है। इस वर्ष विभाग की ओर से विभिन्न तरीकों से बिजाई करने पर 312 किसानों को लगभग 13 लाख 94 हजार रुपये अनुदान के रूप में वितरित किए हैं।
इससे किसानों को उनकी फसलों का तो मुनाफा मिलेगा ही इसके साथ साथ खेत की उर्वरा शक्ति की बढ़ेगी और किसानों को प्रोत्साहन मिलेगा। जिले में लगभग 624 एकड़ जमीन पर किसानों ने चार विधियों के तहत गन्ने की बिजाई की है। इसमें चौड़ी पतियों के साथ अंत गन्ना बीजाई, वाइड्रो स्पेसिंग, ट्रैस मलचिंग व सीड नर्सरी विधि शामिल है।
विज्ञापन


ये मिलता है किसानों को अनुदान-
विदित रहे कि चौड़ी पत्तियों के साथ अंत फसलें विधि के तहत जिले में 116 किसानों ने 232 एकड़ भूमि पर गन्ने की बिजाई की है। इसमें फसलों के बीच चार फीट दूरी का अंतर रखना होता है, जिसके बीच में सब्जियों की फसलों की बिजाई की जाती है। इस विधि के तहत गन्ने की बिजाई करने से किसानों को 3600 रुपये प्रति एकड़ अनुदान राशि दी जाती है। वहीं वाइड्रो स्पेसिंग विधि के तहत 68 किसानों ने 136 एकड़ भूमि पर गन्ने की बिजाई की है। इस विधि के तहत किसानों को 3000 रुपये प्रति एकड़ अनुदान दिया जाता है। इसी प्रकार ट्रैस मलचिंग विधि के अनुसार 117 किसानों ने जिले में बिजाई की है। जिनको 500 रुपये प्रति एकड़ विभाग के अनुसार अनुदान दिया गया है। इस तरह सीड नर्सरी के तहत किसानों ने 22 एकड़ में 11 किसानों ने बिजाई की है। इसमें 5000 रुपये प्रति एकड़ किसानों को अनुदान प्रदान किया जाता है।
विज्ञापन

चार फीट दूरी पर की जाती है बिजाई-
जिला गन्ना अधिकारी कुलदीप शर्मा ने बताया कि चौड़ी पत्तियों के साथ अंत फसलें (वाइड्रो विद इंटरक्रॉपिंग) विधि के तहत गन्ने की बिजाई चार फीट की दूरी पर करनी पड़ती है। इसके बीच में अन्य फसलें जैसे सब्जियों व सरसों की बिजाई की जाती है। चौड़ी पत्तियां (वाइड्रो स्पेसिंग) विधि में भी गन्ने की बिजाई चार फीट दूरी पर की जाती है। लेकिन इसमें अन्य फसलों की बिजाई नहीं की जाती। इसे खाली रखना होता है। सीड नर्सरी विधि में पहले गन्ने की नर्सरी तैयार की जाती है। जब वह 25 दिन की हो जाती है तो गन्ने की बिजाई की जाती है। वहीं ट्रैस मलचिंग विधि में किसानों को गन्ने की पत्ती में आग न लगाकर खेत में ही गलानी होती है। इससे जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ती है। उन्होंने कहा कि जैविक नियंत्रण को विभाग द्वारा बढ़ावा दिया जाने का प्रयास किया जाएगा। गन्ने में नुकसान पहुंचाने चोटी बेधक कीट को रासायनिक नियंत्रण के साथ साथ दूसरे विकल्पों को भी किसानों तक पहुंचाया जाएगा। जिसमें मुख्यत पैरामल ट्रप, ट्राइको कार्ड और दूसरे विकल्पों के बारे में किसानों को जागरूक किया जाएगा। ताकि हमारी मृदा व पर्यावरण को दूषित होने से बचाया जा सके।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें