संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। छात्राओं को सुरक्षित, सुगम और समयबद्ध परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से रोडवेज विभाग ने विशेष योजना के तहत 22 अतिरिक्त बसों का संचालन शुरू किया है। विभाग का दावा है कि इससे छात्राओं को स्कूल,
कॉलेज और विश्वविद्यालय आने-जाने में काफी सहूलियत मिलेगी और समय की भी बचत होगी।
लंबे समय से कई ग्रामीण रूटों पर छात्राओं को भारी भीड़ के बीच सफर करना पड़ रहा था। कई बार बसों में जगह नहीं मिलने के कारण छात्राओं को खिड़कियों और दरवाजों के पास खड़े होकर जोखिम भरा सफर करना पड़ता था। इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए रोडवेज विभाग ने सर्वे और प्लानिंग के बाद भीड़भाड़ वाले रूटों की पहचान कर विशेष बसें शुरू की हैं।
विभाग के अनुसार स्कूल और कॉलेज समय के दौरान कुछ रूटों पर यात्रियों की संख्या काफी अधिक रहती थी। ऐसे मार्गों को चिन्हित कर अतिरिक्त बसें चलाई गई हैं। रोडवेज विभाग इन रूटों की नियमित मॉनिटरिंग भी कर रहा है, ताकि छात्राओं को यात्रा के दौरान किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। साथ ही अन्य भीड़भाड़ वाले रूटों पर भी यात्रियों की संख्या का आकलन किया जा रहा है। जिन मार्गों पर जरूरत महसूस होगी, वहां भविष्य में अतिरिक्त बसें बढ़ाई जाएंगी।
इन रूटों पर चलाई गईं विशेष बसें
इन विशेष बसों में सौंगरी से कैथल, कमालपुर से कैथल, धनौरी से कैथल, कुराड़ वाया सिणद, बदनारा से पूंडरी, पूंडरी से बाकल, कुकरकड़ा, करोड़ा और पाई, डीग से कैथल, राजौंद, रेहड़ा और नीमवाला, कैथल से राजौंद, चीका से कैथल, कैथल से बालू, खरकां से अगौंध, गुलियाणा, बालू, खरकां-पहाड़पुर-चक्कू-लदाना, कुराड़ से कैथल वाया भागल, अगौंध, गुलियाणा से बालू, बाकल से पूंडरी, अलेवा, राजौंद, सेरधा, किठाना, पाई, पूंडरी, सिरसल और हाबड़ी सहित विभिन्न रूट शामिल हैं।
छात्रा सोनिया, मंजीत, पूजा और अंकिता ने बताया कि स्पेशल बसें शुरू होने के बाद अब वे समय पर कॉलेज और विश्वविद्यालय पहुंच रही हैं। पहले कई बार बसों की भीड़ और इंतजार के कारण स्टॉपेज पर घंटों खड़ा रहना पड़ता था, लेकिन अब समय की बचत हो रही है।
छात्राओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था लागू की गई है। कई स्थानों से शिकायतें मिल रही थीं कि बसों में अत्यधिक भीड़ के कारण छात्राओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अभिभावकों की मांग पर अतिरिक्त बसें चलाई गई हैं और उनके संचालन की नियमित निगरानी की जा रही है। -विपुल कुमार, यातायात प्रबंधक