कैथल। कैथल रोडवेज डिपो में मंगलवार को बैठक का आयोजन किया गया। इसमें हरियाणा रोडवेज कर्मचारी सांझा मोर्चा के बैनर तले 25 जुलाई को अंबाला छावनी स्थित परिवहन मंत्री के आवास पर प्रस्तावित न्याय मार्च की तैयारियों पर चर्चा की गई। बैठक में विभिन्न कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया और मार्च को सफल बनाने का आह्वान किया।
सांझा मोर्चा के राज्य नेता कृष्ण किछाना, महावीर संधु, जसवीर सिंह, डिपो प्रधान प्रवीण कुमार, उपप्रधान सुशील कुमार और सचिव बलवान कुंडू ने कहा कि रोडवेज विभाग में वर्षों से नियमित भर्ती नहीं होने के कारण चालक, परिचालक, मैकेनिक, हेल्पर, सफाई कर्मचारी सहित अन्य श्रेणियों के हजारों पद रिक्त पड़े हैं। इससे मौजूदा कर्मचारियों पर कार्यभार लगातार बढ़ रहा है और यात्रियों को भी अपेक्षित परिवहन सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार सरकारी रोडवेज बेड़े को मजबूत करने के बजाय निजी ठेकों के माध्यम से इलेक्ट्रिक बसों के संचालन पर अधिक जोर दे रही है। उनका कहना था कि इन बसों में सरकारी रोडवेज की तरह विभिन्न रियायतें और नि:शुल्क यात्रा योजनाएं लागू नहीं हैं जिससे आम यात्रियों को असुविधा होती है। साथ ही महंगे अनुबंधों के कारण विभाग पर वित्तीय बोझ भी बढ़ रहा है। बैठक में रामनिवास किठाना, अरुण कुमार, मनोज राणा, कुलदीप कुमार, संदीप रामगढ़, गुरमेल, नवीन कुमार, सत्यनारायण और कमल मौजूद रहे।
कर्मचारियों ने की जोखिम भत्ता देने की मांग
बैठक में अमित शर्मा, दिलबाग, जयभगवान और मनोज कुमार ने कहा कि सरकार समय-समय पर यूनियन प्रतिनिधियों के साथ वार्ता तो करती है लेकिन बैठकों में स्वीकार की गई मांगों को भी लागू नहीं किया जाता। इससे कर्मचारियों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। कर्मचारियों ने प्रमुख मांगों में चालक और परिचालकों का पे-ग्रेड बढ़ाने, हरियाणा कौशल रोजगार निगम के तहत कार्यरत कर्मचारियों को नियुक्ति तिथि से नियमित करने, अर्जित अवकाश और धुलाई भत्ता पूर्व की भांति बहाल करने, लंबित बोनस का भुगतान, ग्रुप-डी कर्मचारियों को तकनीकी पदों पर पदोन्नति, पारदर्शी तबादला नीति लागू करने, 2016 बैच के चालकों को नियमित करने, एक्सग्रेशिया नीति की शर्तें हटाने और जोखिम भत्ता देने की मांग दोहराई है।