सीवन। स्वर्गद्वार मंदिर में शनिवार को महंत लक्ष्मी नारायण पुरी ने धार्मिक चर्चा की। इस मौके पर महंत ने कहा कि प्रभु का स्मरण, उनकी पूजा और उन्हें सच्चे दिल से याद करना जीवन की सबसे बड़ी साधना है। यह साधना न केवल मनुष्य को शांति प्रदान करती है, बल्कि उसे आत्मिक बल और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा भी देती है।
उन्होंने कहा कि प्रभु सिमरन से व्यक्ति अपने भीतर की नकारात्मकता को दूर करता है और अपने मन में सकारात्मकता का संचार करता है। कहा कि प्रभु को सच्चे दिल से याद करने का अर्थ केवल प्रार्थना तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके उपदेशों को जीवन में अपनाना और दया, करुणा व सत्य जैसे गुणों को आत्मसात करना है। यह आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का साधन है।
उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति ईश्वर की महिमा में ध्यान केंद्रित करता है तो उसका मन शांत होता है और उसे आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है। महंत लक्ष्मी नारायण पुरी ने कहा कि साधारण जीवन में भी प्रभु स्मरण किया जा सकता है। यह न केवल मंदिरों में जाकर किया जाता है, बल्कि हर कार्य में ईमानदारी, निष्ठा और प्रेम भाव से किया गया प्रयास भी प्रभु भक्ति का ही एक रूप है। प्रभु स्मरण के माध्यम से ही व्यक्ति सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर लक्ष्य को पहचान पाता है।
उन्होंने कहा कि प्रभु को सच्चे दिल से याद करना मानव जीवन को सार्थक और आनंदमय बनाता है। यह साधना जीवन के हर क्षण में मार्गदर्शन प्रदान करती है। इस अवसर पर संजय कंसल, सुभाष गर्ग, विजय सरदाना, भीषू चौधरी, अशोक गोयल, नरेश सिंगला, महावीर मंगला व अन्य उपस्थित रहे। संवाद