फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kaithal News: पाई में दूध-घी के रेट बढ़ाए, 21 सदस्यों की एक कमेटी गठित की

विज्ञापन
गांव पाई में दूध-घी के दाम बढ़ाने को लेकर बैठक करते पशुपालक। ग्रामीण
विज्ञापन
पाई। पाई के ग्राम सचिवालय में सोमवार को देर शाम पाई के पशु पालकों की एक बैठक संपन्न हुई। इसमें दूध व घी के दाम बढ़ाने का निर्णय लिया गया। ग्रामीण विक्रम ने बताया कि इस समय महंगाई चरम सीमा पर है। प्रत्येक वस्तु के भाव काफी अधिक मात्रा में बढ़ गए हैं। पशु चारा के बीजों के लेने और उत्पादन करने का खर्चा भी काफी अधिक बढ़ गया है। इतना ही नहीं खल बिनौला आदि के भावों में भी बहुत अधिक वृद्धि हो चुकी है। बढ़ती महंगाई के कारण पशु पालकों को अपने पशु बेचने पड़ रहे हैं। पशुओं के दूध से महंगा तो बोतल में मिलने वाला पानी है।
विज्ञापन

उन्होंने बताया कि पशु पालकों को अपने पशुओं का दूध 50 से 60 रुपये प्रति किलो बेचना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि अब गांव का कोई भी पशु पालक अपने पशुओं का दूध कम दामों पर नहीं बेचेगा। भैंस का दूध 100 रुपये और गाय का दूध 80 रुपये प्रति लीटर से कम मूल्य पर नहीं बेचा जाएगा जबकि भैंस का घी 1500 व गाय का घी 2500 रुपये प्रति किलो होगा।
यदि कोई इससे कम दामों पर बेचता पाया गया तो उस पर पहली बार में 5100 और दूसरी बार में 11 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। इसके लिए 21 सदस्यों की एक कमेटी गठित की गई है। दूध व घी तय दामों पर बेचने के लिए गांव में मुनादी भी करवाई गई। पशुपालकों ने इस निर्णय का स्वागत किया और गांव में दूधियों को दूध नहीं दिया गया। बैठक में यह भी निर्णय लिया कि कुछ लोग सूखे दूध से तैयार करके व रसायन युक्त दूध कम दामों पर बेच रहे हैं।
विज्ञापन

कुछ लोगों ने इस निर्णय पर जताया एतराज
नाम न छापने की शर्त पर कुछ ग्रामीणों ने कहा कि एकाएक दोगुने दाम करना गलत है। जो पशु तुरंत के ब्याये हुए हैं, उनका दूध पतला होता है, जो कम दामों पर मिलता है और गरीब परिवार उसके लिए किसी तरह अपने परिवार को चाय व दूध दे देते थे। अब दाम बढ़ने से वे अपने बच्चों को दूध व चाय आदि नहीं पिला सकेंगे।

गांव पाई में दूध-घी के दाम बढ़ाने को लेकर बैठक करते पशुपालक। ग्रामीण

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें