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Kaithal News: मौनी अमावस्या पर आज बन रहे दुर्लभ शुभ संयोग

Sun, 18 Jan 2026 02:11 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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17केएलटी1: पंडित विशाल शांडिल्य
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कलायत। माघ माह के कृष्ण पक्ष की तिथि के दिन आने वाली अमावस्या को मौनी अमावस्या कहते हैं। इसे माघी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू धर्म में मौनी अमावस्या का विशेष महत्व है। इस दिन स्नान-दान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि मौनी अमावस्या के दिन गंगा का जल अमृतमय हो जाता है इसलिए इस दिन गंगा स्नान करने खास विधान है।
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इस साल मौनी अमावस्या के दिन बेहद ही शुभ संयोग बन रहा है। ऐसे में जान लीजिए कि इस दिन क्या करना फलदायी रहेगा और क्या नहीं। पंडित शांडिल्य ने बताया की अमावस्या तिथि पर चंद्रमा कमजोर स्थिति में होता है जिससे पितृ शांति के लिए यह दिन सर्वोत्तम माना गया है। इस दिन पितरों की शांति के लिए किए गए कर्मकांड अधिक प्रभावशाली और शांतिपूर्ण माने जाते हैं। सर्वार्थ सिद्धि व शिववास योग में अमावस्या तिथि पर किए गए उपाय पितृ दोष निवारण में विशेष रूप से कारगर होते हैं।

मौनी अमावस्या पर बन रहा है ये शुभ संयोग

पंडित विशाल शांडिल्य ने बताया की उदया तिथि के आधार पर 18 जनवरी को ही मौनी अमावस्या का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन रविवार सुबह 10 बजकर 14 मिनट से लेकर अगले दिन सुबह 7 बजकर 31 मिनट तक सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा। इसके अलावा हर्षण योग और शिव वास योग भी पूरे दिन बने रहेंगे। साथ ही पूर्वाषाढ़ा और उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का शुभ संयोग भी रहेगा। यह समय स्नान दान और पूजा-पाठ के लिए बहुत शुभ माना जाता है। अमावस्या तिथि इस बार रविवार के दिन पडऩे और साथ में व्यतीपात योग भी होने से दुर्लभ अर्धोदय योग बनेगा। स्कंदपुराण में इस योग को बहुत पुण्यदायी बताया गया है। स्कंद पुराण के अनुसार अर्धोदय योग में सभी स्थानों का जल गंगा के जल के समान हो जाता है और सभी ब्रह्म के समान शुद्धात्मा वाले हो जाते हैं। साथ ही, इस अर्धोदय योग में स्नान दान आदि पुण्य कार्य करने से कई गुना अधिक फल की प्राप्ति होती है।
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मौनी अमावस्या पर रखा जाता है मौन व्रत

मौनी अमावस्या पर मौन रहना आत्मसंयम का प्रतीक है। यह दिन ऋषि मुनियों और तपस्वियों की तपस्या और साधना की स्मृति को समर्पित है। पौराणिक कथाओं के अनुसार सृष्टि के प्रारंभ में इसी दिन मनु ने अपने मौन व्रत का पालन किया था। इसलिए इसे मौनी अमावस्या कहा जाता है। इस दिन मौन व्रत रहकर स्नान करना चाहिए। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान आदि कर पूरे दिन मौन रहकर उपवास करते हैं। इस दिन भगवान विष्णु के साथ पीपल के पेड़ की पूजा की जाती है। जो व्यक्ति इस समय गंगा स्नान या अन्य पवित्र नदियों में स्नान करता है उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।
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