-गांव कैलरम में किया फसल अवशेष प्रबंधन प्रशिक्षण शिविर का आयोजन
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। गांव कैलरम में ग्राम स्तरीय फसल अवशेष प्रबंधन प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। इस मौके पर कृषि विज्ञान केंद्र कैथल के विस्तार शिक्षा वैज्ञानिक डॉ. जसबीर सिंह ने कहा कि फसल अवशेष प्रबंधन समय की मांग है। फसल अवशेष प्रबंधन करने से जहां जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ती है वहीं किसान की आमदनी में भी इजाफा होता है। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करके कृषि विश्वविद्यालय तथा प्रशासन का सहयोग करें।
उन्होंने किसानों को आगे बताया कि पराली जलाने से पर्यावरण प्रदूषण बढ़ने के साथ-साथ जमीनों में उपस्थित मित्र कीट भी नष्ट होते हैं जो हमारी पैदावार पर विपरीत प्रभाव डालते हैं। केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. अमित कुमार ने बताया कि किसान भाई सरकार द्वारा अनुदान पर दी जाने वाली मशीनों जैसे सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, स्मार्ट सीडर, सरफेस सीडर, जीरो टिलेज मशीन, मल्चर, चॉपर तथा रोटावेटर के माध्यम से फसल अवशेषों का यथास्थान प्रबंधन कर सकते हैं तथा सरकार खेतों से बाहर फसल अवशेष प्रबंधन के लिए भी मशीनें जैसे रेकर, बेलर इत्यादि भी उपलब्ध करवा रही है।
उन्होंने इसके अतिरिक्त आगामी रबी फसल गेहूं की सिफारिश उन्नत किस्मों व खरपतवारनाशकों की भी जानकारी दी। केंद्र के मृदा वैज्ञानिक डॉ. दीपक कुमार ने किसानों को बताया कि जैविक कार्बन भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाने का प्रमुख कारक हैं। भूमि के जैविक कार्बन को तीन ही तरीकों से बढ़ाया जा सकता है या तो खेतों में जैविक खादों जैसे गोबर खाद, केंचुआ खाद आदि डालें या अपने खेत में हरी खाद जैसे ढैंचा, मूंग इत्यादि उगाकर भूमि में मिला दें तथा तीसरा तरीका, फसल अवशेषों का यथास्थान प्रबंधन करके खेत में ही मिला दें। इस शिविर में कैलरम के लगभग 50 किसानों ने हिस्सा लिया।