कैथल। हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग की सामान्य पात्रता परीक्षा (सीईटी) के पहले दिन, पहली पारी के प्रश्नपत्र में कैथल और रजिया सुल्तान से जुड़ा सवाल पूछा गया।
प्रश्न था— हरियाणा का कैथल शहर ऐतिहासिक रूप से किस प्रसिद्ध महिला योद्धा से संबंधित है? विकल्पों में रजिया सुल्तान, रानी लक्ष्मीबाई, बेगम हजरत महल और रानी अवंतीबाई के नाम शामिल थे। प्रश्न का सही उत्तर था :
रजिया सुल्तान।
यह सवाल कैथल की ऐतिहासिक पहचान को रेखांकित करता है, लेकिन विडंबना यह है कि रजिया सुल्तान का मकबरा, जो मानस रोड पर स्थित है, आज बदहाली और उपेक्षा का शिकार है।
झाड़ियों में घिरी ऐतिहासिक धरोहर
आज यह स्थल एक छोटे से टीले के रूप में खेतों में झाड़ियों से घिरा हुआ है। यहां न तो आने-जाने का रास्ता है, न कोई संकेतक या विकास कार्य।
स्थानीय लोग इस धरोहर के संरक्षण और जीर्णोद्धार की मांग वर्षों से कर रहे हैं, लेकिन पुरातत्व विभाग और प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल नहीं हुई। इससे लोगों में निराशा है।
इतिहास को जानने की जिज्ञासा बढ़ी, मगर हकीकत शर्मसार
परीक्षा में पूछे गए सवाल ने जहां एक ओर विद्यार्थियों में इतिहास जानने की जिज्ञासा जगाई, वहीं दूसरी ओर यह सवाल प्रशासन के उस दोहरे रवैये को उजागर करता है, जो एक ओर इतिहास को पाठ्यक्रमों और परीक्षाओं में स्थान देता है, लेकिन जमीनी स्तर पर संरक्षण के प्रयास नहीं करता। संवाद
इतिहास के पन्नों में दर्ज कैथल का युद्ध
इतिहासकार कमलेश शर्मा के अनुसार, रजिया सुल्तान भारत की पहली मुस्लिम महिला शासक थीं। 1240 ई. में रजिया सुल्तान और उनके शौहर मालिक इक्तियार-उद-दीन अल्तुनिया, जो बठिंडा के तत्कालीन गवर्नर थे, दिल्ली की सत्ता पुनः प्राप्त करने के लिए रवाना हुए थे। कैथल में ही उनका युद्ध सुल्तान बेहराम शाह की सेना से हुआ। पराजय के बाद, सेना की बगावत में रजिया और अल्तुनिया दोनों की हत्या कर दी गई और यहीं कैथल में रजिया को दफनाया गया।
अधूरी रह गई
विकास योजना
करीब आठ वर्ष पूर्व, प्रशासन ने यहां छह लाख रुपये की लागत से ‘रजिया बेगम उद्यान’ विकसित करने की योजना बनाई थी, लेकिन वह योजना भी कागज़ों में ही सिमट कर रह गई।