नरेंद्र राणा, कमल बहल
संवाद न्यूज एजेंसी
पूंडरी (कैथल)। पूंडरी की मशहूर फिरनी... यह स्लोगन देखते ही ग्राहकों के कदम खुद-ब-खुद दुकानों की ओर मुड़ जाते हैं। सावन का महीना शुरू होते ही पूंडरी और फतेहपुर की गलियों में फिरनी की मिठास हवा में घुल जाती है। यह मिठाई न केवल हरियाणा, बल्कि देश-विदेश में भी अपनी खास पहचान बनाए हुए है।
पूंडरी में इस समय 200 से अधिक फिरनी की दुकानें संचालित हैं, जिन पर सीजन के दौरान लगभग 5 करोड़ रुपये का कारोबार होता है। यहां के करीब 700 परिवार इस परंपरागत व्यवसाय से जुड़े हुए हैं और उनकी आजीविका का मुख्य स्रोत यही मिठाई है।
दुकानदारों के अनुसार, यहां फिरनी की कीमत जहां 200 रुपये प्रति किलो है, वहीं विदेशों में मंगवाने पर इसकी कीमत कोरियर और पैकिंग समेत 700 से 900 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाती है। इसके बावजूद विदेशी ग्राहक इसे मंगवाने में पीछे नहीं रहते।
फिरनी की शुरुआत 1936 में फतेहपुर गांव के स्व. हरिकिशन ब्यास ने की थी। उस दौर में अंग्रेज अफसर भी इसकी तारीफ करते नहीं थकते थे। अब पूंडरी फिरनी निर्माण का प्रमुख केंद्र बन गया है।
एक महीने तक खराब नहीं होती फीकी फिरनी
फिरनी बनाने वाले हलवाइयों ने बताया कि फीकी फिरनी को एक महीना पहले ही बनाना शुरू कर देते हैं और जैसे-जैसे उन्हें थोक में ऑर्डर मिलते हैं, वैसे-वैसे फीकी फिरनी पर मीठा चढ़ाकर बेचा जाता है। पूंडरी ही एक ऐसा इलाका है, जिसके पानी में शोरा नहीं होता इसलिए फिरनी का स्वाद बेजोड़ होता है। पूंडरी क्षेत्र के 4.5 किलोमीटर दायरे के बाहर पानी में शोरे की मात्रा होने के कारण फिरनी का स्वाद बेहतरीन नहीं बन पाता। यही कारण है कि पूंडरी में बनाई गई फिरनी पूरे भारत में मशहूर है।
सीजन में 100 दुकानों पर खूब बनती है फिरनी
सावन के महीने में फतेहपुर व पूंडरी की हर गली, हर सड़क व हर मोहल्ले में फिरनी बनाते हुए कारीगर सहज ही दिखाई देते हैं। 100 से अधिक दुकानों पर फिरनी बनती है लेकिन ब्यास, कृष्ण मिष्ठान, सलामत स्वीट्स, देव स्वीट्स, ए न, वालिया, सैनी स्वीट्स, बबला व मंगू की फिरनी प्रसिद्ध बताई जाती है। लगभग 700 कारीगर काम करते हैं। मतलब 700 परिवारों का गुज़ारा भी होता है। फिरनी के बनाने वाले दुकानदार कृष्ण कुमार ने बताया कि सावन के महीने में फतेहपुर पूंडरी में हर रोज लगभग 100 क्विंटल फिरनी तैयार होती है।