महिला एवं बाल विकास मंत्री कमलेश ढांडा के निवास पर पिछले आठवें दिनों से धरने पर बैठी आंगनबाड़ी वर्करों को महिला पुलिस कर्मियों द्वारा धरने से उठाया गया। पुलिस ने उन्हें अपनी गाड़ी में बैठाकर लघु सचिवालय छोड़ दिया। जहां पर उन्होंने सरकार के खिलाफ जमकर नारे बाजी की
बता दें कि मांगों को लेकर आंगनबाड़ी वर्कर पिछले आठ दिनों से राज्यमंत्री के निवास पर धरना दे रही थी। बुधवार को धरने की अध्यक्षता यूनियन की राज्य सह सचिव कमला दयौरा ने की व मंच संचालन जिला प्रधान मनजीत बुढ़ा खेड़ा ने किया। सुबह दस बजे धरने पर पहुंची आंगनबाड़ी वर्कर मांगों को लेकर सरकार व मंत्री के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। राज्य सह सचिव कमला दयौरा ने कहा कि वे पिछले सप्ताह से महामारी को देखते हुए सोशल डिस्टेंस में केवल पांच वर्कर ही धरने पर बैठती है। लेकिन मंत्री ने अभी तक भी एक बार भी उनकी मांगों के बारे में नहीं सोचा। उन्होंने कहा कि पिछले पांच माह से कर्मचारियों को मानदेय नहीं मिला व तीन साल से सेंटरों का किराया बाकी पड़ा है। इन मांगों को लेकर व अनिश्चितकालीन धरने पर बैठी थी। उन्होंने कहा कि पिछले दो दिन से राज्यमंत्री निवास पर ही है। बीते दिन मांगों का ज्ञापन भी सौंपा। लेकिन उन्होंने समाधान करने की बजाय उलटा पुलिस प्रशासन के माध्यम से उन पर गिरफ्तारी का दबाव बनाया जा रहा है।
लघु सचिवालय छोड़ा गया आंगनबाड़ी वर्करों को
पुलिस प्रशासन द्वारा आंगनबाड़ी वर्करों को धरना समाप्त कर घर जाने के लिए बार बार समझाया गया। लेकिन आंगनबाड़ी वर्करों ने पुलिस कर्मियों की बात को अनदेखा किया। कुछ ही देर में महिला पुलिस कर्मचारी की सहायता से धरना समाप्त करने को कहा गया, लेकिन वर्करों द्वारा बात न माने जाने पर दोनों पक्षों में जमकर तू तड़ाक हुई। उसके बाद एचएचओ अमित कुमार द्वारा दीवार पर वर्करों द्वारा लगाया गया बैनर उतारा गया और महिला पुलिस कर्मियों ने पांच में से दो आंगनबाड़ी वर्करों को जिप्सी में बैठाया। जिप्सी में बैठने के बाद भी आंगनबाड़ी वर्करों की नारेबाजी जारी रही। उसके बाद उनको लघु सचिवालय परिसर में छोड़ दिया गया। वहां पर उन्होंने अन्य वर्करों के साथ मिलकर सरकार व प्रशासन का खूब कोसा। उसके बाद करीब दो घंटे बाद वहां से पैदल पिहोवा चौंक पर पहुंचे। वहां पर नारेबाजी कर उन्होंने धरना समाप्त कर दिया। इस अवसर पर जिला कुरुक्षेत्र की प्रधान परमजीत कौर व अमृत कौर मौजूद थी।