संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। श्री कपिल मुनि धाम परिसर में मुगल बादशाह औरंगजेब द्वारा तोड़े गए प्राचीन शिव मंदिर के स्वरूप को बचाए रखना मंदिर की पांच पीढिय़ों से देखरेख कर रहे पुजारियों और श्रद्धालुओं के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की ओर से कलायत विधानसभा में तीर्थों को विकसित करने के लिए चलाए गए विशेष अभियान के बीच शिव मंदिर की सुध लेने की मांग जोर पकड़ने लगी है।
देवी दवाला श्री कपिल मुनि सेवा ट्रस्ट एवं पुजारी संजय गौतम व अनिरुद्ध गौतम का कहना है कि 1700 ईवी में गीत-संगीत और कलाओं का बड़ा केंद्र बिंदु रहे कलायत को मुगल बादशाह ने अपना निशाना बनाया था। कलाएं और हिंदुओं की धार्मिक संस्कृति की परंपराएं बादशाह को नागवार थी। इसलिए उसने कलायत के प्राचीन शिव मंदिर के शिव लिंग, मध्य प्रदेश के खुजराहों के मंदिरों से मेलखाती चौखट और कलाकृतियों को खंडित कर दिया। भारी मशक्कत के बाद पुजारियों ने ढहाए गए मंदिर के विभिन्न हिस्सों को जोडकऱ जैसे-तैसे इनके मूल स्वरूप को जिंदा करने का प्रयास किया था।
उन्होंने बताया कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री एवं कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के संस्थापक गुलजारी लाल नंदा ने वर्ष 1970 में बतौर रेल मंत्री श्री कपिल मुनि मंदिर के जीर्णोद्धार योजना का शिलान्यास किया था। इसके तहत सांख्य दर्शन के प्रवर्तक भगवान श्री कपिल मुनि मंदिर को विकसित किया गया। इस दौरान औरंगजेब के तोड़े गए एक शिव मंदिर के स्वरूप का पुनरोद्धार किया गया।
करीब 50 वर्ष के लंबे समय अंतराल में धरोहरों को विकसित करने के लिए मांग के अनुरूप बजट नहीं मिल पाया है। यही कारण है कि धरोहरों का स्वरूप विलुप्त हो रहा है। कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के सचिव अनुसार प्राचीन कपिल मुनि सरोवर के सुंदरीकरण के लिए विशेष तौर से योजना तैयार की गई है। केडीबी मंदिर का दौरा कर वर्तमान स्थिति की रिपोर्ट तैयार करेगा।