जिले में पर्यावरण को साफ सुथरा बनाए जाने की दिशा में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के संयोजन में जिला पर्यावरण प्लान तैयार किया जा रहा है। जिसमें करीब डेढ़ दर्जन विभाग जुटे हुए हैं। सभी विभागों की योजनाएं तैयार करके उससे एक जिलास्तरीय योजना तैयार होगी। जो जिले का पर्यावरण प्लान होगा। इसके बाद एडीसी की अध्यक्षता में बनाई गई कमेटी इसकी लगातार मॉनिटरिंग करेगी। इस समय जिले में पर्यावरण की स्थिति संतोषजनक है।
एनजीटी के निर्देश पर तैयार हो रहा है प्लान-प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा यह जिलास्तरीय प्लान तैयार किया जा रहा है। जिसमें चाहे मेडिकल वेस्ट की बात हो, हवा के प्रदूषण की बात हो, नहरों व नदी में बहने वाले पानी की बात हो, भू-जल की बात हो या फिर मिट्टी की बात हो, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के ई-वेस्ट की बात हो या फिर शहरों से एकत्रित होने वाले कचरे के प्रबंधन की बात हो, इन सभी प्वाइंटस को ध्यान में रखकर शून्य प्रदूषण की स्थिति की योजना तैयार की जा रही है।
जिलास्तरीय प्लान में सबसे अहम भूमिका प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की है। इसके साथ-साथ स्थानीय निकाय विभाग के माध्यम से नगर परिषद कैथल के अलावा गुहला, पूंडरी, राजौंद और कलायत नगर पालिकाओं द्वारा एकत्रित किए जाने वाले डोर टू डोर कचरा एकत्रित करने के कार्य में प्रदूषण कम करने की योजना है। इन दो विभागों के अलावा जनस्वास्थ्य विभाग, हुडा विभाग, डीएफओ, कृषि, उद्योग करीब डेढ़ दर्जन विभाग इस प्लान में शामिल हैं।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से मिली जानकारी के अनुसार एनजीटी ने ये आदेश जारी किए हैं। जिसमें इन सभी विभागों की अलग-अलग कार्य योजना मांगी गई है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के रिजनल ऑफिसर राजेंद्र ने बताया कि जिले में पर्यावरण संरक्षण के लिए डिस्ट्रिक्ट एनवायरनमेंट प्लान बनाया जा रहा है। कैथल जिले में वैसे तो प्रदूषण के मामले में स्थिति संतोषजनक श्रेणी में आती है। लेकिन शहरों से कचरे, मेडिकल वेस्ट, ई-वेस्ट, पानी की स्वच्छता, हवा की स्वच्छता सहित अन्य पैरामीटर्स को लेकर कई विभागों के साथ मिलकर कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इसी माह में यह प्लान तैयार कर लिया जाएगा। सभी विभाग अपनी-अपनी योजनाएं दे रहे हैं। इसके बाद एडीसी की अध्यक्षता में गठित कमेटी इसकी लगातार मॉनिटरिंग करेगी।