संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी आश्रम में नव वर्ष के आगमन पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें ब्रह्माकुमारी बहन रेखा ने प्रवचन सुनाए और श्रद्धालुओं ने शिव की महिमा का व्याख्यान कर भजनों का गायन किया।
बीके बहन रेखा ने कहा कि नववर्ष पर सभी व्यक्तियों बुराइयों को छोड़ने और अच्छाइयों को ग्रहण करने का संकल्प लेना चाहिए ताकि शिव बाबा द्वारा इस पावन धरा पर बनाई गई मनुष्य रूपी बगिया पूरे विश्व में अपनी महक फैला सके। किसी प्रकार का अपराध करने से न केवल अपराध करने वाले को संसार में बुराई मिलती है बल्कि अपराध करने वाले व्यक्ति का स्वयं का मन भी उसे कचोटता है।
बहन रेखा ने कहा कि मुख के मौन की साधना के साथ-साथ मन के मौन की साधना भी पक्की होनी चाहिए। मौन जितना कुछ कह देता है उतना वाणी भी नहीं कह पाती। मन का मौन धारण करना महत्वपूर्ण है पर यदि मन खिन्न व उदास हो तो भी मनुष्य की साधना अपूर्ण होती है। जो वाणी ने कहा वह बह गया और जो मन ने कहा वह रह गया। इसका वर्णन करते हुए कहा कि यदि मौन रहा जाए तो अनंत अर्थों की संभावना बनी रहती है तथा उन्नति के मार्ग प्रशस्त होते रहते हैं। इसीलिए मौन को अनन्त भाषा की संज्ञा भी दी हुई है।
उन्होंने कहा कि शिव बाबा हमेशा अपने बच्चों को यही संदेश देते हैं कि यदि वाणी पर विराम हो और मन पर लगाम हो तो मुख मौन और मन मौन की साधना एक ही साथ सहजता से ही हो सकती है। कार्यक्रम के समापन अवसर पर श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया गया।