संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिले में भीषण गर्मी के साथ बिजली व्यवस्था पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। महज 11 दिनों में बिजली की दैनिक मांग 34 लाख यूनिट से बढ़कर 60 लाख यूनिट तक पहुंच गई है, जिससे आपूर्ति तंत्र पर भारी बोझ पड़ रहा है। तापमान में वृद्धि के कारण एसी, कूलर और पंखों के उपयोग में तेजी आई है, जिसके चलते खपत रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है।
बढ़ते लोड के चलते अघोषित कटौती, बार-बार ट्रिपिंग और तकनीकी फॉल्ट आम हो गए हैं। खासकर रात के समय कटौती से लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो रही है। मच्छरों के प्रकोप के बीच छोटे बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है।
स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जहां पहले रोजाना करीब 115 शिकायतें दर्ज होती थीं, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 150 से 200 तक पहुंच गया है। उपभोक्ताओं में रोष बढ़ रहा है और उन्होंने बिजली निगम से अघोषित कटौती पर रोक लगाने व आपूर्ति सुचारू रखने की मांग की है।
इस साल बढ़ी खपत : इस साल बिजली की खपत बढ़ गई है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, 2026 में जनवरी में 10.66 करोड़, फरवरी में 11.55 करोड़, मार्च में 10.84 करोड़ और अप्रैल में अब तक 4.50 करोड़ यूनिट बिजली खर्च हो चुकी है। वहीं 2025 में जनवरी में 10.50 करोड़, फरवरी में 11.34 करोड़ और मार्च में 10.13 करोड़ यूनिट खपत दर्ज की गई थी। अप्रैल में 900 लाख यूनिट बिजली खर्च हो चुकी है।
बिजली चोरी पर शिकंजा, 22 दिनों में 65 मामले पकड़े
जिले में बिजली चोरी रोकने के लिए निगम की 24 टीमें लगातार अभियान चला रही हैं, फिर भी चोरी के मामले सामने आ रहे हैं। बीते 22 दिनों में 65 मामलों का खुलासा कर करीब साढ़े 13 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। जांच के दौरान कहीं कुंडी डालकर तो कहीं मीटर से छेड़छाड़ कर बिजली चोरी पकड़ी गई। जिले में 3 लाख 74 हजार उपभोक्ताओं और 293 गांवों में फैले नेटवर्क के कारण निगरानी चुनौती बनी हुई है।
एसडीओ व जेई स्तर के अधिकारी टीमों के साथ नियमित छापेमारी कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि बिजली चोरी से निगम को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ आपूर्ति व्यवस्था भी प्रभावित होती है, जिससे ईमानदार उपभोक्ताओं को लो वोल्टेज और कटौती जैसी समस्याएं झेलनी पड़ती हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार अप्रैल से अब तक 7811 कनेक्शनों की जांच में 2800 मामलों में चोरी पकड़ी गई और करीब 7.60 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया, जिसमें से 4.72 करोड़ रुपये की वसूली हो चुकी है।