28kht_21_कैथल- मलिकपुर गांव में किसान के खेत में पड़े आलू।
कैथल। आलू के दामों में आई भारी गिरावट के चलते किसानों को मायूस होना पड़ रहा है। गुहला-चीका के सीवन क्षेत्र में आलू और अन्य सब्जियों की ज्यादा खेती की जाती है। लेकिन सब्जियों के दाम न मिलने के चलते किसान निराश हैं। कुछ दिन पहले मंडी में आलू 600 रुपये क्विंटल के हिसाब से बिक रहा था, वहीं अब आलू की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है। किसानों का आलू मात्र 250 से लेकर 300 रुपए क्विंटल के हिसाब से ही मंडी में बिक रहा है। यही कारण है कि किसान बुरी तरह संकट में आ गए हैं। आलम यह है कि किसान अपनी लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं।
गांव मलिकपुर के किसान रिंकू ने बताया कि उन्होंने 2 एकड़ जमीन में आलू लगाया हुआ है। मंडी में 250 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से आलू जा रहा है। यह करीब 10-15 सालों बाद इतना कम रेट मिल रहा है। हमने एक एकड़ आलू की खेती में करीब 40 हजार खर्च किया है, लेकिन हमारे एक एकड़ से करीब 20 हजार रुपये का आलू निकल रहा है, इससे हमें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
किसान राजेश ने बताया कि कुछ दिनों पहले 600 प्रति क्विंटल के हिसाब से आलू बिका था। लेकिन अब 250 से 300 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से ही बिक रहा है। एक एकड़ में करीब 45,000 रुपए आलू की खेती में खर्च किया हुआ है, लेकिन उसके आधे रेट में हमारे आलू 1 एकड़ से निकल रहे हैं। इससे तो हमारा खर्च भी नहीं निकल रहा है।
किसान नेता विक्रम कसाना ने कहा कि हरियाणा की मंडियों में आलू के भाव में और गिरावट दर्ज की गई है, जिससे सफेद आलू उत्पादक किसान गंभीर आर्थिक संकट में फंसता जा रहा है, इसके बावजूद भावान्तर भरपाई योजना अब तक लागू नहीं की गई, जो किसानों के साथ अन्याय है। कसाना ने स्पष्ट किया कि यदि किसानों की मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो संगठन को आंदोलन का रास्ता अपनाने पर मजबूर होना पड़ेगा।
28kht_21_कैथल- मलिकपुर गांव में किसान के खेत में पड़े आलू।
28kht_21_कैथल- मलिकपुर गांव में किसान के खेत में पड़े आलू।