कैथल/पाई। जिस गांव में जिस गौत्र की चौपाल, खेड़ा एवं नंबरदारी होगी, उस गांव में उसी गोत्र का दूसरे गांव का रहने वाला व्यक्ति बेटी का रिश्ता नहीं कर सकेगा। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और इसका पालन किया जाएगा। यह फैसला पाई खाप के प्रधान मनीराम कादियान ने लिया। उन्होंने बताया कि सतरोल खाप की ओर से लिए कुछ निर्णय स्वीकार्य हैं, लेकिन सभी फैसलों को पाई खाप नहीं मानेगी।
मनीराम कादियान ने कहा कि सदियों से परंपरा चली आ रही है कि जिस गांव में किसी एक गोत्र के लोगों की संख्या ज्यादा है या फिर उस गांव में उस गोत्र की चौपाल है या गोत्र का अपना दादा खेड़ा है और उस गोत्र की नंबरदारी है। उस गांव में किसी दूसरे गांव में रहने वाला उसी गोत्र का व्यक्ति अपनी बेटी का रिश्ता नहीं कर सकता। उस गांव में रह रहे अन्य गोत्र के लोग भी उस गोत्र से संबंधित लड़की का रिश्ता नहीं ले सकते। जहां भी ऐसी स्थिति हो जाती है, वहां भाईचारा बन जाता है। पाई खाप में करीब 28 गोत्र आते हैं। सदियों से इसका पालन किया जा रहा है। अब भी इन गोत्रों में इस परंपरा का निर्वहन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सतरोल खाप द्वारा कई फैसले ठीक लिए गए हैं। वहीं कुछेक ऐसे फैसले हैं जो स्वीकार्य नहीं है। मां का गौत्र छोड़ने का फैसला वे नहीं मानेंगे। शेष कई फैसले स्वीकार करने योग्य हैं। जैसे गांव की गांव में, समगौत्र में एवं सीमा में साथ लगते गांव में 36 बिरादरी में विवाह प्रतिबंधित है। इसका भी पालन किया जाता रहेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि उनकी खाप में अपना गोत्र व मां को गोत्र छोड़ना अनिवार्य है। उन्होंने यह बताया कि पहले दादी का गोत्र भी छोड़ा जाता था, लेकिन अब उस पर पाबंदी अधिक अनिवार्य नहीं है। उन्होेंने कहा कि एक गांव में रहने वाले व्यक्ति चाहे वह किसी भी गोत्र से संबंधित हो आपस में उनका भाई बहन का रिश्ता होता है। इसे निभाना भाईचारे की भावना को दर्शाता है। इससे लोगों में भाईचारा बना रहता है।
बैनीवाल खाप के महासचिव भरत सिंह बैनीवाल ने कहा कि यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। जिसके तहत जिस गांव में एक गौत्र का अपना खेड़ा, चौपाल एवं नंबरदारी है, उस गांव में उसी गौत्र का बाहर का रहने वाला कोई व्यक्ति रिश्ते नहीं करता। सभी इसका पालन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सतरोल खाप द्वारा जो भी फैसले लिए गए हैं, उन फैसलों पर हम टीका-टिप्पणी नहीं करना चाहते। बैनीवाल खाप सतरोल खाप का आह्वान करती है कि जो भी फैसले लिए गए हैं, उन पर अपनी खाप में सहमति बनाएं तथा आपसी मिल बैठकर भाईचारा कामय करते हुए समाज हित का फैसला लें। जो सभी को स्वीकार्य हो।