कैथल। इन दिनों रसोई गैस सिलिंडर की किल्लत ने आम जनता से लेकर होटल और ढाबा संचालकों तक की परेशानी बढ़ा दी है। गैस एजेंसियों के चक्कर काटने के बावजूद लोगों को समय पर सिलिंडर नहीं मिल पा रहा है, जिसके चलते रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है। गैस एजेंसियों के पास स्टॉक लगातार कम होता जा रहा है। कई उपभोक्ताओं को 3 से 5 दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है जबकि कुछ लोगों को खाली हाथ ही लौटना पड़ रहा है।
हालात ऐसे बन गए हैं कि उपभोक्ताओं को दूर-दराज के गांवों से अपनी दुकानें बंद करके शहर आना पड़ रहा है, लेकिन फिर भी उन्हें गैस नहीं मिल पा रही। इस संकट का सबसे ज्यादा असर होटल और ढाबा संचालकों पर देखने को मिल रहा है। व्यावसायिक गैस सिलिंडर की सप्लाई बाधित होने के कारण कई संचालक अब मजबूरी में लकड़ी के चूल्हों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे न केवल उनके काम करने की गति धीमी हो गई है बल्कि खर्च भी बढ़ गया है। लकड़ी की कीमतें भी इन दिनों काफी बढ़ी हुई हैं, जिससे उनकी जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। उपभोक्ता सुनीता ने बताया कि हम गांव से आते हैं और कई बार खाली हाथ लौटना पड़ता है। घर का सारा काम प्रभावित हो रहा है।
लकड़ी के चूल्हों से निकलने वाला धुआं भी एक बड़ी समस्या बनकर सामने आया है। ढाबा संचालकों और कर्मचारियों की आंखों में जलन और सांस संबंधी दिक्कतें बढ़ रही हैं, वहीं, ग्राहक भी धुएं के कारण असहज महसूस कर रहे हैं। दूसरी ओर, कुछ होटल और ढाबों पर घरेलू गैस सिलिंडरों का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है, जो नियमों के खिलाफ है। प्रशासन की ढिलाई के चलते यह प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है, जिससे आम उपभोक्ताओं के हिस्से का गैस भी प्रभावित हो रहा है। रेहड़ी संचालकों की स्थिति भी काफी खराब हो गई है। व्यावसायिक सिलिंडर नहीं मिलने के कारण कई लोगों ने अपनी रेहड़ियां अस्थायी रूप से बंद कर दी हैं, इससे उनकी रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही गैस सप्लाई सामान्य नहीं हुई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
यह बोले लोग
- किराना दुकानदार राजेश कुमार ने बताया कि उन्हें अपनी दुकान बंद करके गैस एजेंसी के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। कई बार पूरा दिन निकल जाता है, लेकिन सिलिंडर नहीं मिलता। इससे काम पर भी असर पड़ रहा है।
- ढाबा संचालक सुरेंद्र सिंह ने कहा कि व्यावसायिक सिलिंडर नहीं मिल रहे, इसलिए मजबूरी में लकड़ी के चूल्हे का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। लकड़ी महंगी है और धुएं से आंखों में जलन होती है। ग्राहक भी कम हो रहे हैं।
- रेहड़ी संचालक रमेश ने कहा कि गैस सिलिंडर नहीं मिलने के कारण कुछ दिनों के लिए रेहड़ी बंद करनी पड़ी। रोज कमाने-खाने वाले लोगों के लिए यह बहुत बड़ी परेशानी है। उन्होंने कहा कि व्यावसायिक सिलिंडर का स्टॉक खत्म हो चुका है और सप्लाई बंद है।
लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाता कैथल-करनाल रोड स्थित ढाबा संचालक।