गांव बलवंती में सरपंच पद का चुनाव लड़ने की तैयारी पिता ने कर ली थी लेकिन नई शर्तों के कारण बेटे को चुनाव मैदान में उतार दिया। नतीजा यह निकाला कि राजेंद्र सिंह ढुल का बीटेक कर रहा बेटा कविंदर सिंह चुनाव जीत गया। अब इस पंचायत की बागडोर एक युवा पढ़े-लिखे के हाथ आ गई है। उम्मीद है कि अब युवा सोच का सरपंची भी असर देखने को मिलेगा। सरपंच बने कविंदर सिंह गांव में वाई-फाई सिस्टम लागू करने की प्लानिंग कर रहे हैं।
गांव बलवंती निवासी राजेंद्र सिंह ढुल ने बताया कि वे करीब छह माह से चुनाव लड़ने की तैयारी में थे लेकिन शैक्षणिक योग्यता के चलते उन्होंने नामांकन नहीं भरा। बीटेक तृतीय वर्ष के विद्यार्थी बेटे कविंदर सिंह को चुनावी समर में उतारा। गांव ने भी कविंदर सिंह को आशीर्वाद दिया है। अब बेटा गांव का विकास करवाएगा।
सरपंच बने कविंदर सिंह ने कहा कि वे बीटेक तृतीय वर्ष में है। गांव में सरपंच का चुनाव लड़ने का पहले कोई इरादा नहीं था लेकिन बाद में बने हालात के चलते वे उम्मीदवार बन गए। उन्हें गांव के युवा वर्ग सहित सभी का सहयोग मिला। 107 वोट से विजयी हुए। गांव में कुल 1250 वोट हैं जिसमें से उन्हें 624 वोट मिले। द्वितीय उम्मीदवार को 517 तो तीसरे उम्मीदवार को 48 वोट मिले।
कविंदर सिंह बताते हैं कि वे गांव में वाई-फाई सिस्टम शुरू करने की योजना पर काम कर रहे हैं ताकि युवा वर्ग को इंटरनेट के लिए परेशानी न हो। इसके अलावा गांव में जिम खोला जाएगा। गांव में बच्चों की पढ़ाई के लिए अलग से लाइब्रेरी की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा गांव से पॉलीथिन, ठोस कचरा एवं लिक्विड कचरे के लिए अलग-अलग प्रबंधन करने की भी योजना है।