कैथल। जिला उपभोक्ता फोरम ने चोरी हुई स्कूटी के बीमा दावे को खारिज करने के मामले में शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया है। आयोग ने बीमा कंपनी की सेवा में कमी मानते हुए शिकायतकर्ता महिला को कुल 28 हजार रुपये का भुगतान 30 दिनों के भीतर करने के आदेश दिए हैं। इसमें 18 हजार रुपये बीमा राशि, पांच हजार रुपये मानसिक पीड़ा के लिए और पांच हजार रुपये मुकदमा खर्च के रूप में शामिल हैं।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि तय समय में भुगतान नहीं होने पर कंपनी को इस राशि पर सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। 30 दिनों के भीतर इस राशि का भुगतान करना होगा। आयोग में दायर शिकायत के अनुसार महिला ने अपनी टीवीएस जूपिटर स्कूटी का बीमा कराया हुआ था।
स्कूटी चोरी होने के बाद उन्होंने पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई और बीमा कंपनी के समक्ष दावा प्रस्तुत किया। हालांकि कंपनी ने एफआईआर दर्ज कराने और बीमा कंपनी को सूचना देने में देरी सहित अन्य तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए बीमा दावा अस्वीकार कर दिया।
मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने शिकायतकर्ता और बीमा कंपनी, दोनों पक्षों की दलीलों और रिकॉर्ड पर उपलब्ध दस्तावेजों का अवलोकन किया। आयोग ने पाया कि वाहन की चोरी का तथ्य प्रमाणित हो चुका है और केवल तकनीकी आधारों पर बीमाधारक को उसके वैध दावे से वंचित नहीं किया जा सकता।
आयोग ने कहा कि बीमा कंपनियों का दायित्व वास्तविक दावों का निष्पक्ष निस्तारण करना है, न कि मामूली प्रक्रियागत कमियों के आधार पर उन्हें खारिज करना। आयोग ने अपने आदेश में बीमा कंपनी के रवैये को सेवा में कमी करार देते हुए शिकायतकर्ता को राहत प्रदान की।