संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। अखिल भारतीय किसान सभा हरियाणा की बैठक में हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (एचईआरसी) की विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट को किसान और उपभोक्ता विरोधी बताते हुए रद्द करने की मांग की गई। जिला प्रधान जसबीर सिंह और जिला सह सचिव धर्मपाल भुना ने कहा कि रिपोर्ट लागू होने से बिजली वितरण व्यवस्था में निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ने की आशंका है, जिसका सीधा असर किसानों और ग्रामीण उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।
किसान नेताओं ने कहा कि समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस दिए जाने से निजी कंपनियां अधिक मुनाफे वाले औद्योगिक, व्यावसायिक और रिहायशी क्षेत्रों पर अपना ध्यान केंद्रित कर सकती हैं। वहीं, किसानों और ग्रामीण उपभोक्ताओं को बिजली उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी सरकारी बिजली कंपनियों पर ही रह सकती है। इससे बिजली वितरण व्यवस्था में असमानता बढ़ने की आशंका है।
बैठक में कहा गया कि बिजली वितरण व्यवस्था में निजी कंपनियों की बढ़ती भूमिका से किसानों को मिलने वाली कृषि बिजली सब्सिडी और ग्रामीण उपभोक्ताओं को मिलने वाली रियायती बिजली भी प्रभावित हो सकती है। किसान सभा ने सरकार से मांग की कि बिजली व्यवस्था में किसी भी बदलाव से पहले किसानों, ग्रामीण उपभोक्ताओं और बिजली कर्मचारियों के हितों को प्राथमिकता दी जाए।
जसबीर सिंह ने कहा कि यदि एचईआरसी की ओर से निजी कंपनी को बिजली वितरण का लाइसेंस देने की दिशा में कदम उठाया गया तो किसान, ग्रामीण उपभोक्ता और बिजली कर्मचारी मिलकर आंदोलन करेंगे। उन्होंने खाप पंचायतों, किसान संगठनों, सरपंचों और नागरिकों से भी इस मुद्दे पर एकजुट होने की अपील की।