पूंडरी। फतेहपुर में प्रसिद्ध माता मनसा देवी मंदिर में आयोजित की जा रही श्रीमद्भागवत कथा में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। कथावाचक अरविंद शास्त्री जी चित्रकूट वाले ने भगवान की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि मनुष्य भगवान की कृपा प्राप्त करके ही इस दुख रूपी माया से पार हो सकता है, किंतु भगवत कृपा कोई आकस्मिक घटना नहीं है। जो-जो जीव भगवान के शरणापन्न हुए, उन पर भगवान की कृपा हुई।
भगवान ने अपना सब कुछ देकर उन जीवों को मालामाल कर दिया। वे महापुरुष बन गए- तुलसी, सूर, मीरा, कबीर। उन्होंने शरणागति शब्द का अर्थ बताते हुए कहा कि कुछ न करना ही शरणागति है, लेकिन यह कुछ न करना कोई भी जीव कर नहीं सकता, क्योंकि वेद के सिद्धांत के अनुसार कोई भी जीव एक क्षण को भी अकर्म नहीं रह सकता। उन्होंने याद दिलाते हुए कहा कि कर्म दो प्रकार के होते हैं। एक मानसिक कर्म तथा दूसरा मानसिक व शारीरिक कर्म। भले ही हम शरीर से कोई कर्म न करें, लेकिन मन एक क्षण को भी चुप नहीं रह सकते।
उन्होंने कहा कि इस मानव शरीर में जीव अपना चरम लक्ष्य परमानंद की प्राप्ति कर सकता है। माता मनसा देवी मंदिर के प्रमुख पुजारी देवेंद्र शर्मा फतेहपुर ने बताया कि 30 मार्च तक चलने वाली इस भागवत कथा के अंतिम दिन पूजा-अर्चना के पश्चात श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जाएगा। भगवत कथा को सफल बनाने में समाजसेवी अशोक गोयल बजरंग वाले, आढ़ती सेठ चांदीराम गोयल, ईश्वर मोहना, पवन गोयल, डा. मदन रोहिल्ला सराहनीय योगदान कर रहे हैं।