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Kaithal News: अधिकारियों को रास नहीं आ रही चीका बीडीपीओ की कुर्सी

Fri, 08 Mar 2024 11:48 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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गुरमीत सीड़ा
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गुहला-चीका। चीका के बीडीपीओ की कुर्सी किसी भी अधिकारी को रास नहीं आ रही। ऐसा यहां के लोगोंं का कहना है। दरअसल, पिछले एक वर्ष में करीब 12 बीडीपीओ स्तर के अधिकारियों का तबादला कर दिया गया है। पिछले 20 दिनों में ही चीका से चार बीडीपीओ का तबादला किया है जिसकी क्षेत्र में खूब चर्चा है।

खंड स्तर के मुख्य अधिकारी बीडीपीओ के बार बार हो रहे तबादलों से जहां पंचायतों के विकास कार्य ठप होकर रह गए हैं वहीं कार्यालय में तैनात अन्य कर्मचारियों में भी असुरक्षा का माहौल पैदा हो रहा है।
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जानकारी के अनुसार, बीडीपीओ राजबीर सिंह का 17 फरवरी को तबादला किया गया था। राजबीर सिंह के तबादले के बाद सुमिता पुनजा को चीका का बीडीओ लगाया गया।

सुमिता पुनजा ने 27 फरवरी को कार्यभार संभाला और 29 फरवरी को उनका भी तबादला हो गया। सुमिता पुनजा के तबादले के बाद चीका में बीडीपीओ के लिए विशाल बाजवान के आदेश हुए है लेकिन पद ग्रहण करने से पहले ही उनका भी तबादला हो गया और उनकी जगह एक बार फिर से सुमिता पुनजा को चीका का बीडीपीओ लगाया गया है, जिन्होंने शुक्रवार तक कार्यभार ग्रहण नहीं किया था।

सरपंच एसोसिएशन चीका के प्रधान गुरताज सिंह अगौंध, गुरजंट सिंह खुशहाल माजरा, कुलदीप सिंह हंसू माजरा, पंचायत समिति सदस्य यशबीर सिंह, गुरविंद्र सिंह ने कहा कि चीका से बीडीपीओ के बार-बार हो रहे तबादलों ने खंड गुहला की 66 पंचायतों के विकास कार्य ठप करके रख दिए हंै।

चीका के बीडीपीओ कार्यालय में कर्मचारियों का टोटा पिछले लंबे समय से चला आ रहा है। जानकारी के अनुसार, इस कार्यालय में सहायक के दो पद सृजित है लेकिन दोनों पद पिछले दो वर्षों से खाली पड़े हैं।

इसी प्रकार से अकाउंटेंट, समाज शिक्षा एवं पंचायत अधिकारी के साथ साथ लीगल एडवाइजर का पद भी पिछले कई सालों से खाली पड़ा है। कार्यालय में क्लर्क के दो पद सृजित हैं लेकिन सालों से एक ही क्लर्क से जैसे तैसे करके काम लिया जा रहा है। कार्यालय में कर्मचारियों के ना होने से यहां आने वाले लोगों के काम नहीं हो पाते जिससे लोग सरकार पर अपना गुस्सा निकालते हैं। खंड के सरपंचों ने चीका में एक स्थायी बीडीपीओ नियुक्त करने की मांग की है। संवाद
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पिछले एक साल में चीका से दर्जन भर बीडीपीओ के तबादले किए गए है। बार बार बीडीपीओ बदले जाने से जहां दफ्तर के काम प्रभावित हुए है वहीं गांवों के विकास कार्य भी ठप्प पड़ गए हैं। अधिकारी के बार बार बदले जाने से सरकार की योजनाएं भी समय से लोगों तक नहीं पहुंच पाती, जिसका सरकार और जनता दोनों को नुकसान होता है। -डिंपल, अध्यक्ष ब्लाक समिति, गुहला चीका।
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