कैथल। जींद रोड ओवरब्रिज के नीचे डेहा बस्ती को बने करीब 100 साल बीत गए हैं, लेकिन यहां आज तक न सीवरेज व्यवस्था की गई, ना ही शौचालय बनाए गए।
यह करीब घर हैं, लेकिन सभी इन सुविधाओं के मोहताज हैं। सरकार द्वारा स्वच्छता के नाम पर करोड़ों रुपये तो खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन इस बस्ती को आज तक ये सुविधाएं नहीं मिल पाई हैं।
कुछ लोग शौचालय बनाने की स्थिति में भी हैं, लेकिन सीवरेज न होने के कारण शौचालय बनाना संभव नहीं है। कुछेक लोगों ने भूमि में गड्ढे खोदकर व्यवस्था की है। लेकिन अधिकतर लोगों के पास शौचालय की सुविधा नहीं है। इस कारण महिलाएं रेलवे स्टेशन एवं सड़कों किनारे खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। इस मजबूरी में महिलाएं अपने आप को कितना असहज एवं असुरक्षित महसूस करती होंगी, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
पीने के पानी की भी व्यवस्था नहीं
जींद रोड ओवरब्रिज के नीचे डैहा बस्ती को बने करीब 100 साल बीत गए हैं। लेकिन यहां सीवरेज एवं शौचालय व्यस्था के अलावा पीने के पानी के लिए लोग तरसे रहते हैं। ऐसा नहीं है कि इन महिलाओं और पुरुषों ने आवाज नहीं उठाई। वे इस संबंध में कई बार जाम लगा चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। बस्ती के प्रधान कर्मबीर, रामस्वरूप, कालू राम, बारू राम, रोशन लाल, कलिराम, बीराराम, दहिया राम, बलवान, सुरेश, सोहन लाल ने बताया कि वे करीब कई साल से यहां रह रहे हैं। लेकिन सरकार ने उन्हें किसी प्रकार की सुविधा नहीं दी। कॉलोनी में न तो सीवरेज व्यवस्था है ना ही शौचालय। पीने के पानी के भी लाले हैं। एक पंप लगा है। सभी कॉलोनी वासी उसी से पानी भरते हैं।
नेता वोट मांगने तो आते हैं पर सुध नहीं लेते
लोगों का कहना है कि एक बार बरसात होने पर लोगों के घरों के अंदर तक पानी चला जाता है। हर बार चुनाव में नेता वोट के लिए आते हैं। इसके बाद उनकी कोई सुध नहीं ली जाती। महिला मीना देवी, जेलो देवी, जिन्द्रों, सरोज, चेली और रोशनी ने बताया कि कॉलोनी में शौचालय की सुविधा न होने के कारण महिलाओं को घरों से बाहर सड़कों पर खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है। बस्ती की महिलाओं व लड़कियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अनेकों बार लिखित रूप से जिला प्रशासन, नगर परिषद व मंत्री को इस समस्या से अवगत करवा चुके हैं, लेकिन समस्या को किसी प्रकार का हल नहीं हुआ है।
लोगों को करना पड़ता है रात का इंतजार
बस्ती की अधिकतर महिलाओं को शौच के लिए रेलवे लाइन के पास जगह का प्रयोग करना पड़ता है। इसके लिए उन्हें रात होने का इंतजार करना पड़ता है। अंधेरे में महिलाओं को भय बना रहता है। जिंद्रो देवी ने कहा कि सरकार द्वारा कोई सुनवाई नहीं की गई है। हर बार वोट डालते हैं, लेकिन वोट डालने के बाद उन्हें कोई नहीं पूछता। इसी प्रकार से मीना देवी ने कहा कि उन्हें शौच के लिए खुले में जाना पड़ता है।
सरकार द्वारा तो योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन उनका क्रियान्वयन नहीं हो रहा है। अधिकारी अपनी मनमानी कर रहे हैं। योजना का सही क्रियान्वयन हो तो सभी को शौचालय की सुविधा मिल सकती है।
-पुनीत चौधरी, एडवोकेट और आरटीआई कार्यकर्ता।