संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। रोडवेज के कैथल डिपो को इस साल नई बसें नहीं मिल सकीं। दूसरी ओर जो पुरानी बसें मिली तो वे भी ज्यादातर खराब रहीं।
इस साल विभाग के आदेशों के तहत बीएस छह तकनीक की नई बसों को झज्जर डिपो में भी भेज दिया गया। उनके बदले में कैथल डिपो को 48 बसें मिली हैं। इनमें ज्यादातर बसें रास्तों में खराब हो जाती हैं, ऐसी शिकायतें मिलीं।
सबसे उल्लेखनीय बात, इन बसों की वैलिडिटी वर्ष 2025 के अंत तक है। यानी नए वर्ष में ये कंडम हो जाएंगी। वहीं, डिपो को खराब बसें मिलने के बाद यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
इसके अलावा परिवहन के क्षेत्र में अन्य कोई बड़ी परियोजना की सौगात भी नहीं मिल पाई है। वहीं, राहत की बात यह रही कि इस साल रोडवेज की एक भी बस कंडम घोषित नहीं की गई हैं।
पिछले साल बसें मिलने से टूटा था रिकाॅर्ड ः पिछले वर्ष 2023 में लगातार 10 साल का रिकॉर्ड टूटा था, क्योंकि इस वर्ष में सबसे अधिक 90 बसें कैथल डिपो में शामिल हुई थी जबकि अंतिम समय में वर्ष 2013 में सबसे अधिक 10 बसें कैथल डिपो के बेड़े में शामिल हुई थी। परंतु इस साल जरूरत के अनुसार बसें न मिलने से ग्रामीण रूटों पर बसों का संचालन कम हुआ है। वहीं, इस साल डिपो में शामिल हुई बीएस छह तकनीक की 96 में से 48 बसों के झज्जर डिपो में जाने के बाद यहां पर फिर से बीएस छत तकनीक की बसें कम हो गई हैं। ऐसे में कई लंबे रूट पर भी बसों का संचालन कम हो गया है। इसमें जयपुर, पठानकोट सहित सहारनपुर का रूट शामिल हैं।
रोडवेज के कैथल डिपो में इस साल नई बसें नहीं आई। परंतु इस समय डिपो में प्र्याप्त संख्या में बसें उपलब्ध है। कैथल डिपो से जो बीएस छह तकनीक की 48 बसों कासे झज्जर डिपों में भेजा गया है। वह एनसीआर के क्षेत्र में प्रदूषण को कम करने के उद्देश्य से विभाग के निर्देशों पर भेजा गया है। सभी रूटों पर जरूर के अनुसार बसों का संचालन किया जा रहा है। इससे यात्रियों को किसी भी प्रकार से परेशानी नहीं हो रही है। -वीरेंद्र स्वामी, यातायात प्रबंधक, कैथल।
भमोरा। फाईल फोटो अंजली- फोटो : mathura