कार्यक्रम में हिस्सा लेते हुए कवि।
कैथल। सद्भावना साहित्य सदन कैथल की ओर से रविवार को आंबेडकर भवन हुड्डा सेक्टर-21 में विचार व काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी का शुभारंभ कवि संजय पाई की रचना से हुआ। उन्होंने स्वार्थपरक होते जा रहे सामाजिक रिश्तों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि न मित्र प्यारे, न धंधे प्यारे, स्वार्थ है सब न्यारे-न्यारे। इसके बाद सुरेश कल्याण ने अपने काव्य पाठ में ईमानदारी और मेहनतकश वर्ग के संघर्ष को स्वर देते हुए कहा कि बिकते हुए सवालों पर ईमान सुबकता देखा है, मैंने मेहनत की आंखों में अंगारा उगता देखा है।
दिल्ली से आए साहित्यकार मास्टर संदीप रंगा ने आधुनिक जीवन में रिश्तों की बदलती तस्वीर पर अपनी रचना प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि दिन-प्रतिदिन मानवीय संबंधों में संभावनाएं कम होती जा रही हैं। वहीं सतबीर जागलान ने अपनी हरियाणवी कविता के माध्यम से बेईमानी के दुष्परिणामों को रेखांकित किया।
मिट्ठू राम ने हार और संघर्ष को अपने अंदाज में प्रस्तुत करते हुए कहा कि मेरे साथ मेरे अपने भी हारे हैं। कवि दिलबाग अकेला ने गरीब व्यक्ति की पीड़ा और सहनशीलता को शब्द देते हुए कहा गरीब को भूख सताएगी कैसे, वो घर से गम खाके निकला है। चांदी राम रंगा ने विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर तंबाकू सेवन से होने वाले दुष्प्रभावों पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे फौजी बलवान सिंह ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में युवाओं में बढ़ती नशे की लत पर गहरी चिंता व्यक्त की।
उन्होंने समाज और परिवारों से युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया। कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार प्रोफेसर अमृतलाल मदान ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। डॉ. विकास आनंद और फौजी बलवान सिंह ने संयुक्त रूप से अध्यक्षता की। मंच संचालन सतबीर जागलान ने किया।
कार्यक्रम के अंत में सद्भावना साहित्य सदन के अध्यक्ष डॉ. विकास आनंद ने अपनी रचना प्रस्तुत की और गोष्ठी में शामिल सभी साहित्यकारों और अतिथियों का स्वागत एवं आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में हिस्सा लेते हुए कवि।