संवाद न्यूज एजेंसी
पूंडरी। नवरात्र के नौ दिन शक्ति की उपासना के दिन है इन दिनों में मां अपने भक्तों के घर में आती है और धन-धान्य, समृद्धि और रक्षा का वरदान देती है। ये विचार पंडित रविदत्त शास्त्री ने प्रवचन में व्यक्त किए। उन्होंने बताया कि नवरात्र अष्टम दिन में मां के महागौरी स्वरूप की पूजा होती है। महागौरी की पूजा करने वाले देश में आज गर्भ के भीतर गोरी को मारा जा रहा है पुत्र की चाह से उसकी निर्मम हत्या की जा रही है।
उन्होंने कहा कि एक कन्या बहन, पत्नी, मां, दादी ना जाने कितने रूपों में घर संभालती है। इसलिए अष्टमी को कन्याओं को पूजते समय यह संकल्प जरूर लेना। पहला यह कि गर्भ के भीतर किसी गौरी की हत्या ने तो करेंगे न हीं करने देंगे। दूसरा स्त्री के प्रति सम्मान की दृष्टि रखेंगे। नवरात्रि में कन्या पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। बिना इसके नवरात्रि पूजा या फिर व्रत पूरा नहीं माना जाता है। उन्होंने कहा कि शास्त्रों में एक कन्या की पूजा से ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दो की पूजा से भोग और मोक्ष, तीन की पूजा से धर्म, अर्थ व काम, चार की पूजा से राज्यपद, पांच की पूजा से विद्या, छह की पूजा से छह प्रकार की सिद्धि, सात की पूजा से राज्य, आठ की पूजा से संपदा और नौ की पूजा से पृथ्वी के प्रभुत्व की प्राप्ति होती है। कन्या पूजन अष्टमी या नवमी किसी भी दिन किया जा सकता है। दो साल की कन्या कुमारी, तीन साल की त्रिमूर्ति, चार साल की कल्याणी, पांच साल की रोहिणी, छह साल की कालिका, सात साल की चंडिका, आठ साल की शाम्भवी, नौ साल की दुर्गा और दस साल की कन्या सुभद्रा मानी जाती हैं।