फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

प्राकृतिक खेती है हमारे सुरक्षित भविष्य की कुंजी : आचार्य देवव्रत

Tue, 03 Feb 2026 01:12 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
विज्ञापन
2केएलटी1: कार्यक्रम में बोलते आचार्य देवव्रत
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन


कलायत। गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि प्राकृतिक खेती केवल धरती मां को बचाने का माध्यम नहीं, बल्कि यह उत्तम स्वास्थ्य और सुरक्षित भविष्य का भी आधार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में यह अब पूरे देश में एक राष्ट्रीय मिशन बन चुका है। देश के 40 लाख किसान इस पद्धति को अपना चुके हैं, जिनमें से आठ लाख अकेले गुजरात से हैं। हरियाणा सहित पूरे देश में इस पद्धति को बढ़ावा दिया जा रहा है।

दुमाड़ा गांव में हुए कार्यक्रम के दौरान आचार्य देवव्रत ने रसायनों के अंधाधुंध उपयोग से होने वाले नुकसान पर चिंता व्यक्त करते हुए किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि आधुनिक कृषि की अंधी दौड़ में डीएपी और यूरिया के अत्यधिक उपयोग से भूमि बंजर हो रही है और बारिश का पानी भूमि में न जाकर बह जाता है। वहीं प्राकृतिक खेती में केंचुए और अन्य जीवों द्वारा बनाए गए सुराख पानी को भूमि में सोखने में मदद करते हैं और भूमि की उर्वरता बढ़ाते हैं।
विज्ञापन


राज्यपाल ने जीवामृत तैयार करने की विधि भी किसानों को समझाई और बताया कि हरियाणा सरकार देसी गाय खरीदने पर 30,000 रुपये का अनुदान और खाद बनाने के उपकरणों के लिए वित्तीय सहायता दे रही है। यह जीरो बजट खेती किसानों को कर्ज के जाल से मुक्त करती है। उन्होंने सलाह दी कि किसान कम से कम एक एकड़ से प्राकृतिक खेती की शुरुआत करें।
विज्ञापन


प्राकृतिक खेती के वैज्ञानिक पक्ष पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि देसी गाय के एक ग्राम गोबर में लगभग 300 करोड़ सूक्ष्म जीव होते हैं जो भूमि की उर्वरता बढ़ाते हैं। कार्यक्रम गांव दुमाड़ा के शांति फार्म में आयोजित किया गया, जिसमें किसानों, अधिकारियों और कर्मचारियों ने भाग लिया। आयोजन में आए लोगों का धन्यवाद पूर्व आईजी राजपाल सिंह ने किया।

2केएलटी1: कार्यक्रम में बोलते आचार्य देवव्रत

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें