संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। नगर परिषद की ओर से एक साल में सफाई के काम पर 16 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की जाती है। इसके बावजूद नगर परिषद कैथल की स्वच्छता सर्वेक्षण की रैंकिंग में सुधार नहीं हो पाया है। वर्ष 2018 के बाद केवल एक बार ही गर परिषद कैथल की सर्वेक्षण में रैंकिंग 200 से कम रही है। यदि सही तरीके से शहर में सफाई की जाए तो रैंकिंग में सुधार जरूर हो सकता है।
गौरतलब है कि एक साल में डोर-टू-डोर कचरा उठान में करीब नौ करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया जाता है। जबकि करीब पांच करोड़ रुपये का वेतन सफाई कर्मियों को सालाना दिया जाता है। इसके अलावा अन्य एक से दो करोड़ रुपये की राशि वाहनो, डंपिंग यार्ड और रोड स्वीपिंग मशीन पर खर्च की जाती है। शहर में प्रतिदिन 85 से 90 टन कचरा निकलता है। पूरे शहर में 19 कचरा प्वाइंट बना रखे हैं।
लगातार छुट्टी हो तो जगह-जगह लगते हैं कचरे के ढेर : बता दें कि यदि लगातार सरकारी अवकाश होता है तो शहर में सफाई नहीं हो पाती है। लगातार छुट्टी होने के बाद कचरे के ढेर जगह-जगह लगते हैं। क्योंकि अवकाश के दिन डोर-टू-डोर कचरे का उठान नहीं हो पाता है। इस समस्या का भी पिछले कई सालों से कोई समाधान नहीं हो पाता है। इस समय नगर परिषद कार्यालय के सामने, मेन बाजार, डोगरा गेट, सीवन गेट और प्रताप गेट सहित अन्य कई ऐसे स्थान हैं, जहां पर हमेशा कचरे का आलम रहता है। यहां पर सही प्रकार से सफाई न होने के कारण कचरे का उठान भी नहीं हो पाता है।
शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर बेहतर प्रयास किए जाते हैं। इसके लिए दरोगा से लेकर सभी सफाई कर्मियों को बेहतर कार्य करने की हिदायत जारी की गई है। यदि कोई कर्मी या अधिकारी इस मामले में अनदेखी करता है तो उसके खिलाफ उचित कार्रवाई भी की जाती है। इस समय सफाई के लिए बेहतर व्यवस्था की गई है। -कुलदीप मलिक, ईओ, नगर परिषद, कैथल।
सात साल की रैकिंग
2023
365
2022
177
2021
304
2020
199
2019
355
2018
301
2017
282