संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। झारखंड में चल रही 68वीं राष्ट्रीय स्कूल अंडर-14 एथलेटिक्स प्रतियोगिता में जिले के रोहेड़ा गांव की राष्ट्रीय खिलाड़ी हनप्रीत ने शॉट पुट प्रतियोगिता में द्वितीय स्थान प्राप्त कर जिले और राज्य का नाम रोशन किया।
राष्ट्रीय खिलाड़ी हनप्रीत निजी स्कूल में नौंवीं कक्षा की छात्रा हैं। उनकी इस उपलब्धि से स्कूल और क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई है। प्रशंसकों का कहना है कि हनप्रीत ने कड़ी मेहनत और समर्पण से यह मुकाम हासिल किया। उन्होंने प्रतियोगिता में अपना बेहतरीन प्रदर्शन देते हुए कड़ी प्रतिस्पर्धा के बावजूद दूसरा स्थान हासिल किया और रजत पदक जीता। इस सफलता से न केवल उनके माता-पिता, बल्कि पूरे गांव और स्कूल में हर्ष का माहौल है।
एथलेटिक्स खेल प्रशिक्षक व पीजीटी फिजिकल एजुकेशन लेक्चरर सोहन पाल ने बताया कि झारखंड के रांची में 11 से 14 जनवरी तक जारी 68वीं राष्ट्रीय स्कूल एथलेटिक्स प्रतियोगिता में हरियाणा के कैथल जिले के रोहेड़ा गांव की राष्ट्रीय खिलाड़ी हनप्रीत अंडर-14 आयु वर्ग में भाग ले रही हैं। उन्होंने इस बार भी शॉट पुट प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए अपने पिछले रिकॉर्ड 11.63 मीटर को तोड़कर 11.92 मीटर बनाते हुए द्वितीय स्थान प्राप्त कर किया। प्रतिोगिता में रजत पदक जीतकर परिवार का नाम रोशन किया।
एथलेटिक्स खेल प्रशिक्षक सोहन पाल ने कहा कि एथलेटिक्स में ज्यादातर मध्यम परिवार के खिलाड़ी होते हैं। राष्ट्रीय स्कूली एथलेटिक्स प्रतियोगिता चाहे खिलाड़ी किसी भी आयु वर्ग की हो, इसमें बहुत जबरदस्त मुकाबले होते हैं और ये सीनियर से भी ही टफ मुकाबले होते हैं। राष्ट्रीय स्तर पर जीत कर पदक हासिल करना एक खिलाड़ी के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि होती है। इस तरह राष्ट्रीय प्रतियोगिता जीतने पर खिलाड़ी के भविष्य की भी शुरुआत हो जाती है।
उन्होंने कहा कि विजेता खिलाड़ी हनप्रीत की इस उपलब्धि पर सभी को गर्व है। वे अन्य के लिए प्रेरणास्रोत बनेंगी। उन्होंने आगे कहा कि यह सफलता विद्यार्थियों को खेलों में भाग लेने और अपनी प्रतिभा को निखारने के लिए प्रोत्साहित करेगी।
जिले के खेल प्रेमियों ने भी हनप्रीत की इस उपलब्धि की सराहना की है। हनप्रीत की इस सफलता से जिले के अन्य खिलाडिय़ों में भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का उत्साह बढ़ा है। हनप्रीत ने अपनी सफलता का श्रेय अपने कोच, परिवार और स्कूल के शिक्षकों को दिया है। यह उपलब्धि खेल और शिक्षा के क्षेत्र में संतुलन बनाए रखने का एक बेहतरीन उदाहरण है।