संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। क्रांतिकारी मनरेगा मजदूर यूनियन ने शुक्रवार को मनरेगा सप्ताह के अवसर पर आम बजट में कटौती व काम की मांग के संदर्भ में कलायत बीडीपीओ कार्यालय पर प्रदर्शन किया। इसमें गांव, सिमला, रामगढ़, पिंजुपुरा व चौशाला के मजदूर शामिल रहे।
यूनियन पदाधिकारी अजय ने फरवरी में पेश किए गए बजट को मजदूर विरोधी करार दिया। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में मनरेगा बजट के लिए 86 हजार करोड़ का आवंटन किया गया है। हम महंगाई दर से इसकी तुलना करें तो इस वर्ष मनरेगा बजट में 4,000 करोड़ रुपये की कटौती की गई है।
उन्होंने निराशा जताते हुए कहा कि मनरेगा बजट कुल बजट का मात्र 0.24 प्रतिशत रह गया है। इस बजट कटौती का सीधा अर्थ है मजदूरों के कार्यदिवस की कटौती। उन्होंने दावा कर कहा कि ऐसे में मौजूदा बजट से सिर्फ मजदूरों को 40 दिन ही रोजगार मिलेगा। उन्होंने कहा कि कायदे से अगर सरकार को 100 दिन
रोजगार देने का वादा पूरा करना है तो उसको 2.90 लाख करोड़ के बजट का प्रावधान करना चाहिए।
चौशाला गांव की मेट मीना ने बताया कि मनरेगा कानून के तहत 100 दिन के रोजगार की गारंटी दी है, लेकिन कलायत ब्लॉक के मजदूर परिवारों को मुश्किल से 30-40 दिन ही काम मिल पाता है। मनरेगा कानून के तहत काम के आवेदन के 15 दिनों के भीतर अगर काम नहीं मिलता है तो आवेदक मजदूरों को बेरोजगारी भत्ता दिया जाने का प्रावधान है परंतु कलायत कार्यालय का साफ कहना है बेरोजगारी भत्ता नहीं दिया जाएगा। ये साफ तौर पर रोजगार गारंटी के तहत काम ना देना व बेरोजगारी भत्ता ना देना मजदूरों के अधिकारों का उल्लंघन है।