संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। क्रांतिकारी मनरेगा मजदूर संघ के बैनर तले स्त्री अधिकारों के लिए रैली व प्रदर्शन का आयोजन किया गया। काम के पूरे दाम दो, काम नहीं तो बेरोजगारी भत्ता दो, के नारे लगाते हुए महिला मनरेगा मजदूरों ने कैची चौक से बीडीपीओ कार्यालय तक रैली निकाली। मनरेगा यूनियन ने बीडीपीओ को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा।
इस मौके पर यूनियन के प्रभारी अजय ने बताया कि प्रदर्शन में गांव शिमला, चौशाला, रामगढ़ व आसपास गांव में मनरेगा मजदूर विभिन्न समस्याओं से ग्रस्त हैं। यूनियन ने पहले भी मनरेगा मजदूरों के मांगपत्र बीडीपीओ कार्यालय में दिए लेकिन नतीजा सिफर रहा। मनरेगा में कार्यरत स्त्री मजदूर अपने हक व अधिकार की लड़ाई के लिए सड़कों पर उतरी हैं।
चौशाला गांव की मेट मीना ने बताया कि हर गांंव में मनरेगा के 100 मजदूरों में 90 स्त्रियां हैं। उनका कहना था कि कलायत तहसील में किसी भी मनरेगा मजदूर परिवार को पूरे 100 दिन का रोजगार नहीं मिलता। इस समय मजदूरों को औसत 30 से 35 दिन का काम ही एक साल में मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि मनरेगा कानून के तहत एक वर्ष में एक मजदूर परिवार को 100 दिन के रोजगार की गारंटी मिलनी चाहिए। आवदेन के 15 दिन के भीतर काम देने या काम ना देने की सूरत में बेरोजगारी भत्ता देने की बात कही गयी है। गांव शिमला के अनिल ने कहा कि मोदी सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों के कारण मनरेगा के बजट में लगातार कटौती की जा रही है। बजट कटौती का सीधा मतलब श्रम दिवस के कम होने और रोजगार के अवसरों में भी कमी है।