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बच्चे स्वास्थ्य प्रमाण पत्र के लिए भटक रहे हैं, अध्यापक स्कूलों में खाली बैठने को मजबूर

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। शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग के बीच तालमेल की कमी व प्रशासन की भारी अनदेखी का खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है। पहले चार दिन तो विद्यार्थी प्रमाण पत्र के लिए भटकते नजर आए। अब जिला अस्पताल में मेडिकल के लिए विद्यार्थियों से सौ रुपये की फीस ली जा रही है। शिक्षा विभाग और न ही स्वास्थ्य विभाग द्वारा बच्चों की इस परेशानी की ओर ध्यान दिया जा रहा। इससे भी बढ़कर जिला प्रशासन पूरी तरह से इस मुद्दे पर आंख बंद किए है। जिस कारण अध्यापक स्कूलों में खाली बैठे हैं, बच्चे मेडिकल प्रमाण पत्र के लिए भटक रहे हैं।
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इस तरह से रही स्कूलों की स्थिति-
राजकीय ब्वाज स्कूल में कम पहुंचे विद्यार्थी- कमेटी चौक स्थित राजकीय ब्वाय स्कूल में पांचवें दिन शुक्रवार को महज चार से पांच विद्यार्थी स्कूल पहुंचे। कोई अभिभावकों की अनुमति पत्र तो कोई मेडिकल प्रमाण-पत्र लेकर स्कूल पहुंचा। इसके साथ जो बच्चे बिना प्रमाण-पत्र के स्कूल पहुंचे तो उन्हें वापस भेज दिया गया। स्कूल स्टाफ खाली बैठे रहा।
राजकीय कन्या स्कूल में सामान्य रही स्थिति-गीता भवन स्थित राजकीय कन्या स्कूल में भी पांचवें दिन स्थिति सामान्य रही। छात्राएं अभिभावकों की अनुमति के बाद सामान्य स्वास्थ्य जांच स्लिप लेकर स्कूल लेकर पहुंची। प्रिंसिपल रामपाल ने कहा कि धीरे-धीरे बच्चे स्कूलों में आ रहे है। पहले बच्चे स्वास्थ्य की जांच करवाने के लिए स्वास्थ्य केंद्रों पर जा रहे हैं। इसके बाद स्कूल पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि अध्यापक अभिभावकों से संपर्क साधा जा रहा है।
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राजकीय कन्या स्कूल जाखौली अड्डा में भी कम पहुंचे विद्यार्थी-जींद रोड स्थित राजकीय कन्या स्कूल जाखौली अड्डा में शुक्रवार को 10-15 छात्राएं अभिभावकों से अनुमति पत्र के साथ स्कूल में पहुंची। प्रिंसिपल पवन गर्ग ने कहा मेडिकल प्रमाण-पत्र के साथ ही बच्चों को स्कूलों में प्रवेश दिया जा रहा है।
शेरगढ़ स्कूल के बारहवीं कक्षा के छात्र शिवकुमार ने कहा कि उन्होंने तीन दिन पहले जिला अस्पताल में मेडिकल प्रमाण पत्र अप्लाई किया था। इसके लिए उन्होंने सौ रुपये का भुगतान भी किया है। उन्होंने कहा कि पढ़ाई के साथ-साथ आर्थिक बोझ भी पड़ रहा है।
मेडिकल प्रमाण पत्र के कारण स्कूलों में नहीं आ रहे विद्यार्थी-शहर के एक स्कूल में कार्यरत अध्यापक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अधिकतर बच्चे मेडिकल फीस निर्धारित किए जाने पर स्वास्थ्य केंद्रों में नहीं जा रहे। इससे उनकी पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में मध्यम वर्गीय परिवार के बच्चे ही आते है। बच्चों से इस तरह से फीस वसूलना सही नहीं है।
गांव से किराया लगाकर पहुंच रहे जिला अस्पताल- अभिभावकों राकेश, प्रदीप, विनोद, मनीष, सुरेश व अमित ने बताया कि स्कूलों में बच्चों से मेडिकल प्रमाण पत्र मांगा जा रहा है। इसके लिए स्वास्थ्य केंद्रों में चक्कर काटने पड़ रहे है। गांव से ठिठुरती ठंड में किराया लगाकर जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। लेकिन यहां पर दोगुनी मार झेलनी पड़ रही है। ऐसे में जेब भी ढीली हो रही है।
मेडिकल के लिए नहीं है कोई शुल्क- सिविल सर्जन डा. ओमप्रकाश ने कहा कि मेडिकल प्रमाण पत्र के लिए कोई शुल्क नहीं है। अगर इसके बाद भी विद्यार्थियों से किसी प्रकार की फीस ली जा रही है तो पता करवाया जाएगा। संबंधित स्टाफ को गाइडलाइन बताई जाएगी।
जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पूरी तरह से उदासीन- बच्चों की इस समस्या पर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय का रवैया पूरी तरह से उदासीन नजर आ रहा है। विभाग की ओर से स्वास्थ्य विभाग के साथ कोई तालमेल नहीं किया जा रहा। जिसका खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ रहा है।
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