फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

फतेहपुर की माता मनसा देवी : 300 साल पुरानी आस्था, 30 गांवों की कुलदेवी

विज्ञापन
फतेहपुर के मंदिर में माता की फोटो। संवाद
विज्ञापन
पूंडरी। पूंडरी क्षेत्र के फतेहपुर गांव में स्थित माता मनसा देवी का मंदिर करीब 300 साल पुरानी आस्था का प्रतीक है। यह मंदिर केवल फतेहपुर ही नहीं बल्कि आसपास के करीब 30 गांवों के लोगों की श्रद्धा का प्रमुख केंद्र है। इन गांवों के अनेक परिवार माता मनसा देवी को अपनी कुलदेवी के रूप में पूजते हैं। पीढ़ियों से चली आ रही धार्मिक परंपराओं के कारण मंदिर से लोगों का गहरा जुड़ाव है। नवरात्र के दिनों में यहां श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ उमड़ती है।
विज्ञापन

मंदिर की स्थापना के लिए ग्रामीणों में एक मान्यता प्रचलित है। इसके अनुसार फतेहपुर निवासी मेहर सिंह वालिया को एक रात स्वप्न में माता मनसा देवी ने दर्शन दिए। मान्यता है कि माता ने उन्हें बताया कि वह मोहना गांव के मदबल तालाब में पिंडी स्वरूप में विराजमान हैं। बताया जाता है कि पहली रात आए स्वप्न को मेहर सिंह ने सामान्य समझा लेकिन लगातार दूसरी रात भी माता के दर्शन होने पर उन्होंने ग्रामीणों को इसकी जानकारी दी। इसके बाद ग्रामीण मोहना गांव पहुंचे। वहां तालाब में खोज के दौरान मेहर सिंह के पैर किसी वस्तु से टकराए। ग्रामीणों ने वहां से माता की पिंडी प्राप्त की और श्रद्धापूर्वक उसे फतेहपुर लेकर आए। इसके बाद पिंडी की विधि-विधान से स्थापना की गई।

पिंडी स्वरूप में विराजमान हैं माता
मंदिर की प्रमुख विशेषता यह है कि यहां माता की पूजा पिंडी स्वरूप में की जाती है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि माता के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई मनोकामना पूरी होती है। इसी आस्था के कारण आसपास के गांवों के लोग विवाह, संतान प्राप्ति, परिवार की सुख-शांति और अन्य शुभ कार्यों से पहले माता के दरबार में माथा टेकने पहुंचते हैं।
विज्ञापन

30 गांवों के परिवार मानते हैं कुलदेवी
स्थानीय लोगों के अनुसार आसपास के करीब 30 गांवों के अनेक परिवार माता मनसा देवी को अपनी कुलदेवी मानते हैं। परिवारों में विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों के दौरान मंदिर में पूजा-अर्चना करने की परंपरा है। लोग शुभ कार्यों की शुरुआत माता का आशीर्वाद लेकर करते हैं। इस तरह मंदिर धार्मिक आस्था के साथ-साथ क्षेत्र की पुरानी परंपराओं को भी सहेजे हुए हैं।
नवरात्र में उमड़ते हैं श्रद्धालु
चैत्र और शारदीय नवरात्र के दौरान मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना होती है। सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो जाता है। भक्त माता के दर्शन करने, ज्योत प्रज्ज्वलित करने और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। अष्टमी और नवमी के दिन विशेष धार्मिक आयोजन होने से मंदिर परिसर में भक्तिमय माहौल रहता है।
पीढ़ियों से चली आ रही आस्था
फतेहपुर निवासी समाजसेवी लक्की वालिया, संजय वालिया, विनेश वालिया, जिला पार्षद देवेंद्र शर्मा, प्रदीप भुक्कल और दीपक कौशिक ने बताया कि माता मनसा देवी के प्रति लोगों की आस्था पीढ़ियों पुरानी है। परिवारों में बच्चों को माता की कथा और मंदिर से जुड़ी मान्यताओं के बारे में बताया जाता है। इसी कारण युवा पीढ़ी भी इस धार्मिक परंपरा से जुड़ी हुई है। ग्रामीणों के अनुसार करीब तीन शताब्दियों से चली आ रही मान्यताओं और परंपराओं के कारण माता मनसा देवी का मंदिर आज भी क्षेत्र की धार्मिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है। श्रद्धालुओं के लिए यह मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं बल्कि कुलदेवी के प्रति विश्वास और पीढ़ियों से चली आ रही आस्था का प्रतीक है।

फतेहपुर के मंदिर में माता की फोटो। संवाद

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें