संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिले की मंडियों में पीआर धान की आवक इस बार कृषि विभाग के अनुमान से काफी अधिक दर्ज की जा रही है। जबकि मौसम और पैदावार, दोनों ही इस वर्ष कमज़ोर रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यह अतिरिक्त धान आया कहां से। इस पर डीसी ने सख्ती दिखाते हुए तीन एसडीएम की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित की है, जो राइस मिलों को अलाट धान और उनके स्टॉक का भौतिक सत्यापन (पीवी) करेगी।
जांच के दौरान गड़बड़ियों की परतें खुलने की पूरी संभावना है। सूत्रों के अनुसार अगर जांच निष्पक्ष हुई तो कई अधिकारी, आढ़ती, मंडी सचिव, एजेंसी निरीक्षक और राइस मिलर इसमें लपेटे में आ सकते हैं। ठीक इसी तरह का मामला हाल ही में करनाल में उजागर हुआ, जहां राइस मिलों को अलाट धान वहां मौजूद नहीं मिला और संबंधित कर्मचारियों पर केस दर्ज हुआ।
खरीद में फर्जीवाड़े की बू, आंकड़े खुद बोल रहे हैं ः पिछले साल के मुकाबले इस बार प्रति एकड़ उत्पादन 10 से 15 क्विंटल कम बताया जा रहा है, फिर भी मंडियों में धान की आवक ज़्यादा हो चुकी है। यह अंतर खुद ही फर्जीवाड़े की ओर इशारा कर रहा है।
आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष 29 अक्तूबर तक 8,80,684 मीट्रिक टन धान की आवक दर्ज हुई, जबकि गत वर्ष इसी तारीख तक 7,87,950 मीट्रिक टन धान आया था- यानी 92,734 मीट्रिक टन अधिक आवक। इस खेल में एजेंसी, मंडी सचिव, आढ़ती और पंजीकृत राइस मिलर की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं। कई किसान भी धान खरीद प्रक्रिया में घोटाले के आरोप लगा रहे हैं।
इन चार मंडियों में अधिक गड़बड़ी की आशंका
विभागीय सूत्रों के अनुसार जिले की ढांड, कैथल नई मंडी, कैथल अतिरिक्त मंडी और पूंडरी मंडी में आवक अनुमान से कहीं अधिक दर्ज की गई है। आशंका है कि दूसरे राज्यों का धान सस्ते दामों पर खरीदकर सरकारी समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर चढ़ाया गया है। यदि यह सच साबित हुआ तो यह मामला जिले की सबसे बड़ी खरीद गड़बड़ी के रूप में सामने आ सकता है।