कैथल। इस्कॉन प्रचार समिति, कैथल की ओर से आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस पर कथा व्यास साक्षी गोपाल दास महाराज ने सप्तम स्कंध की कथा का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि इस संसार में भगवान के अलावा हमारा कोई सच्चा हितैषी नहीं है। भगवान सभी जीवों से समान प्रेम करते हैं, चाहे कोई उन्हें जाने या न जाने। जिस प्रकार पिता अपने बच्चों का पालन-पोषण करता है, उसी प्रकार भगवान समस्त सृष्टि का सृजन और पालन स्वयं करते हैं और किसी के साथ भेदभाव नहीं करते।
कथा के दौरान उन्होंने बताया कि संसार की सभी वस्तुओं के वास्तविक भोक्ता केवल भगवान श्रीकृष्ण हैं। भगवान आनंदकंद हैं और उन्हें किसी से कुछ प्राप्त करने की इच्छा नहीं होती। वे न किसी से भयभीत होते हैं और न ही किसी से ईर्ष्या करते हैं। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण संसार का सबसे बड़ा सत्कर्म है। चार कुमारों ने भी भागवत महात्म्य का वर्णन करते हुए इसके श्रवण को सर्वोत्तम पुण्य बताया है। उन्होंने कहा कि जैसे भूख लगने पर सौ काम छोड़कर भोजन करना चाहिए, उसी प्रकार हजार काम छोड़कर भागवत कथा का श्रवण करना चाहिए।
कथाव्यास ने श्रीला शुकदेव गोस्वामी और महाराज परीक्षित के संवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान जिनका वध करते हैं, उन्हें भी अपने वैकुंठ धाम में स्थान देते हैं। उन्होंने पूतना, हिरण्याक्ष, हिरण्यकश्यप और शिशुपाल वध जैसे प्रसंगों के माध्यम से भगवान की करुणा और दिव्य लीलाओं का वर्णन किया।
उन्होंने बताया कि जब प्रकृति में सतोगुण की वृद्धि होती है तो देवताओं और ऋषियों का प्रभाव बढ़ता है, रजोगुण बढ़ने पर असुरों और तमोगुण बढ़ने पर यक्ष और राक्षसों का प्रभाव बढ़ता है। इन तीनों गुणों का संचालन काल करता है और काल भगवान श्रीकृष्ण की संकल्प शक्ति का ही स्वरूप है। यह समस्त सृष्टि भगवान की दिव्य लीला है। प्रेस सचिव भारत मदान ने बताया कि कथा के यजमान मोहन लाल गुप्ता, वरिष्ठ अधिवक्ता मनदीप सिंह, रमन सचदेवा, डॉ. विवेक गर्ग (नारायण सेवा संस्थान), दुर्गा प्रसाद और ज्ञान चंद ने दीप प्रज्वलित कर कथा का शुभारंभ किया और कथा व्यास का पुष्पमाला पहनाकर सम्मान किया। कथा के समापन पर भगवान की आरती उतारी गई।
इस अवसर पर दशरथी चरण दास, राधा ऋषिकेश दास, रामभद्र केशव दास, महाभानु मुरारी दास, संजय सखा दास, भास्कर धाम दास, ऐन्द्रा जीवन दास, सचि दुलाल दास, भीमा अभय दास, राम्या पलका दास सहित समिति के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
समिति ने शहरवासियों से अपील की कि वे प्रतिदिन समय पर कथा स्थल पर पहुंचकर श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करें, भगवान का प्रसाद ग्रहण करें और अपने जीवन को आध्यात्मिक रूप से समृद्ध बनाएं।
भक्तों को संबोधित करते हुए साक्षी गोपाल दास। समिति