कलायत। खेतों से गुजरने वाले बिजली के तार से निकली चिंगारी ने गांव कैलरम के किसानों की 40 एकड़ खड़ी गेहूं की फसल जला दी। किसानों ने दमकल विभाग को सूचना देखकर अपने स्तर पर आग बुझाने के प्रयास किए। जब तक दमकल गाड़ी मौके पर पहुंची, तब तक 40 एकड़ भूमि में खड़ी गेहूं की फसल को आग लील चुकी थी। वहीं गांव मटौर के खेतों में लगी आग में चार एकड़ जल गई।
जिन खेतों में आग लगी ये सभी कैलरम से वजीरनगर मार्ग पर हैं। इंद्र सिंह पुत्र मिंया सिंह ने बताया की उनकी 32 एकड़ में खड़ी गेहूं की फसल उनकी आंखों के सामने ही जल गई। वे बेबस और लाचार होकर अपने परिवार से सपनों को जलते हुए देखते रहे। अधिकांश किसानों का कहना है कि उन्होंने भूमि ठेके पर लेकर फसल बोई थी, जो तैयार होते ही आग की भेंट चढ़ गई। जिन किसानों का नुकसान हुआ है, उनका कहना है कि भूमि के ठेके व फसल को तैयार करने पर आए खर्च के कारण पहले ही कर्ज के भार से दबे हैं। अब आग में फसल ही जल गई तो वे लोग तो पूरी तरह से कर्ज में डूब गए है।
गांव कैलरम के जिन किसानों के खेतों में आग लगी उनमें इंद्र पुत्र मियां सिंह के सबसे अधिक 32 एकड़ हैं। बलवान पुत्र गंगा बिसन के दो एकड़, चंद्र पुत्र गंगा बिशन का एक एकड़, राकेश पुत्र ईश्वर का एक एकड़ और प्रदीप प्रत्र बेदी राम के चार एकड़ फसल आग की भेंट चढ़ गई। गांव कैलरम के लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि पीड़ित किसानों को तत्काल मुआवजा दिया जाए।
वहीं उप मंडल के दूसरे गांव मटौर के खेतों में लगी आग में चार एकड़ भूमि पर खड़ी गेहूं की फसल जलगई। ग्रामीणों ने मशक्कत कर आग पर काबू पाया। गांव मटौर के लोगों ने बहुत ही समझदारी का परिचय देते हुए आग को आगे बढ़ने से रोका और अधिक नुकसान होने से बचा लिया।
गांव सिरटा में दो एकड़ गन्ने की फसल जली
गांव सिरटा में दो एकड़ गन्ने की फसल जल गई। फायर बिग्रेड की गाड़ियों ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया। दमकल विभाग के इंचार्ज सुरेंद्र कुमार ने बताया कि शॉर्ट सर्किट के कारण गांव सिरटा व खानपुर के बीच गन्ने की दो एकड़ फसल में आग लग गई। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की गाड़ियां मौके पर पहुंच गई। कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया और पास में गेहूं की फसलों को बचा लिया। उन्होंने सभी किसानों से अपील की कि गेहूं के सीजन में अपने खेत में ट्रैक्टर, हेरा, स्प्रे टंकी रखें। ताकि आग लगने होने पर तुरंत काबू पाया जा सके। दमकल विभाग की गाड़ी जब तक पहुंचती है, तब तक किसानों को काफी नुकसान हो चुका होता है। इसलिए किसान जहां पर भी आग लगती है, हेरो से साथ फसल की बहाई कर दें। ताकि आग को आगे बढऩे से रोका जा सके।