कैथल। महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय, टीक परिसर में शुक्रवार को लोकमाता अहिल्याबाई होलकर स्मृति व्याख्यान आयोजित किया गया। इस मौके पर मुख्य वक्ता राज्य शिक्षा उन्नत अध्ययन संस्थान, गुरुग्राम के निदेशक डॉ. ऋषि गोयल रहे। उन्होंने कहा कि अहिल्याबाई होलकर का जीवन हमें सिखाता है कि नेतृत्व सिर्फ शक्ति का प्रदर्शन नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और जनहित का पर्याय है।
उन्होंने अहिल्याबाई होलकर के बहुआयामी व्यक्तित्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि उनके शासनकाल में न्याय, सुशासन, कला, संस्कृति और धर्म-संरक्षण को नई दिशा मिली।
इससे पहले कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 11 बजे मंगलाचरण के साथ हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के शैक्षणिक अधिष्ठाता एवं कुलसचिव प्रो. संजय कुमार गोयल ने की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि ऐसे ज्ञानवर्धक आयोजन विद्यार्थियों को इतिहास से जोड़ते हैं और वर्तमान संदर्भ में भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। संवाद
विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राजबीर सिंह के मार्गदर्शन में हुए इस कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों को लोकमाता अहिल्याबाई होलकर के प्रेरणादायी जीवन और उनके कार्यों से अवगत कराया। कार्यक्रम की शुरुआत हिंदू अध्ययन विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्ण चन्द्र पांडेय के प्रास्ताविक से हुई थी।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. गोविंद वल्लभ ने किया और धन्यवाद ज्ञापन वेद विभागाध्यक्ष डॉ. अखिलेश कुमार मिश्र ने प्रस्तुत किया।