संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। रोहेड़ा गांव निवासी बलिदानी नरेंद्र सिंधू की पार्थिव देह पहले कैथल के नया बस स्टैंड के समीप स्थित ट्रैफिक पार्क में पहुंची। यहां पर पार्थिव देह पहुंचते ही गांव सहित युवाओं ने तिरंगा से स्वागत कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
इस मौके पर पूर्व सैनिक वेलफेयर एसोसिएशन के सभी सदस्यों ने पुष्पाजंलि अर्पित की और नम आंखों से विदाई दी। इसके बाद जब नरेंद्र की पार्थिव देह राहेड़ा गांव के लिए रवाना हुई तो काफी संख्या में युवाओं ने भारत माता की जय और नरेंद्र सिंधू अमर रहें के नारे लगाए। यह नारे नरेंद्र की पार्थिव देह गांव में पहुंचने तक लगते रहे।
युवा नरेंद्र की पार्थिव देह के साथ बाइक पर तिरंगा लगा सैंकड़ों की संख्या में युवा भी गांव में रवाना हुए और अंतिम यात्रा में शामिल हुए जबकि गांव में नरेंद्र सिंधू की पार्थिव देह के इंतजार कर रहे ग्रामीणों को देह के गांव में पहुंचने की जानकारी मिली तो पूरे गांव में देशभक्ति का माहौल हो गया। गांव की गलियों से लेकर मुख्य सड़कों तक केवल देशभक्ति के नारों की गूंज सुनाई दी।
पार्थिव शरीर के गांव में पहुंचने के बाद पूरा माहौल गमगीन हो उठा और हजारों लोगों की आंखें नम हो गईं। गांव की गलियों से लेकर अंतिम यात्रा स्थल तक लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा। बलिदानी नरेंद्र सिंधू की अंतिम यात्रा के दौरान हर कोई इस वीर सपूत की शहादत को सलाम कर रहा था।
सेना और पुलिस के जवानों ने शहीद नरेंद्र सिंधू को गार्ड ऑफ ऑनर देकर श्रद्धांजलि दी। तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर को देख हर किसी की आंखें भर आईं। अंत्येष्टि के समय पूरा गांव गमगीन था और हजारों लोगों ने एक स्वर में नारे लगाकर अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई दी। इस दौरान भारत माता की जय और नरेंद्र सिंधू अमर रहें नारे लगते रहे।
पिता किसान, मां गृहिणी दो बहनें और एक भाई
नरेंद्र का जन्म पांच अक्तूबर 1996 को गांव रोहेड़ा में हुआ था। उन्होंनें 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई गांव के एक प्राइवेट स्कूल से की थी। पिता दलबीर सिंह किसान हैं और माता रोशनी देवी गृहिणी हैं। परिवार में दो बहनें और एक छोटा भाई है। बहनों की शादी हो चुकी है। छोटा भाई वीरेंद्र अमेरिका के एक होटल में सहायक की नौकरी करता है। वह 2023 में वहां गया था।
गांव में 24 घंटों से घरों में नहीं जले चूल्हे
कैथल। आतंकवादी मुठभेड़ में बलिदान देने वाले रोहेड़ा निवासी लांस नायक नरेंद्र सिंधु के अंतिम संस्कार होने से 24 घंटे तक गांव के घरों में शोक के चलते घरों में चूल्हे नहीं जले। नरेंद्र के बलिदान के बाद पूरे गांव में मातम का माहौल बना था। हर ग्रामीण की जुबां पर केवल लांस नायक नरेंद्र सिंधू का ही नाम था। ग्रामीणों के अनुसार नरेंद्र बेहद मेहनती युवक था। संवाद
जनप्रतिनिधि रहे मौजूद
कैथल। भाजपा जिला अध्यक्ष ज्योति सैनी ने कहा कि धन्य हैं वे मां-बाप जिन्होंने नरेंद्र संधू जैसे वीर सपूत को जन्म दिया। वह अपना बलिदान कर मातृभूमि की सेवा में शहीद हो गए। उन्होंने कहा कि मैं नरेंद्र संधू के बलिदान को नमन करती हूं। इस मौके पर कलायत विधायक विकास सहारण, इनेलो प्रदेश अध्यक्ष रामपाल माजरा, जिला सैनिक एवं अर्ध सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल ओपी शर्मा, डीएसपी सुशील प्रकाश, नायब तहसीलदार सुरेश कुमार, सुरेश संधू, मनीष शर्मा, पूर्व सैनिक एसोसिएशन के प्रधान जगजीत सिंह आदि ने अंतिम यात्रा में पहुंचकर श्रद्धांजलि दी। संवाद