फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

क्योड़क गांव : करोड़ों खर्च के बाद भी पूरी न हुई आस

विज्ञापन
-कैथल। उपलों की मंडी............सीएम के गोद लिए गांव क्योड़क में बनी मंडी में पड़ा उपलों का ढेर। - फोटो : Kaithal
विज्ञापन
कैथल। मैं क्योड़क गांव कैथल जिले का काफी चर्चित गांव हूं। मेरे चर्चित होेने का बड़ा कारण यह है कि मुझे प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने गोद लिया हुआ है। इसके अलावा मैं जिले के बडे़ गांवों में शुमार हूं। इस लिहाज से मेरेविकास के लिए करोड़ों रुपये ग्रांट पर दिए जा रहे हैं। दुर्भाग्य यह है कि इसका सही प्रबंधन न होने के कारण मेरे अंतर्गत रह रहे ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाओं की दरकार है। सीएम के गोद लेने के बाद से अब तक कई करोड़ रुपये मेरे विकास के लिए जारी किए जा चुके हैं। इसके बाद भी ग्रामीणों को अब तक खर्च हुए बजट के अनुसार सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पाई हैं।
विज्ञापन

इसके चलते लोगों को काफी दिक्कतें उठानी पड़ रही है। अब पंचायत चुनाव बिगुल बज चुका है। हर बार की तरह इस बार भी ग्रामीणों की ये समस्याएं पंचायत चुनाव में मुख्य मुद्दा बनेंगी। ग्रामीणों की मानें तो मेरे विकास के लिए आई राशि का उपयोग ज्यादातर स्थानों पर सही तरीके से नहीं हो पाया। यही बड़ा कारण रहा है कि आज भी मेरे हालात सामान्य गांवों की तरह हैं।
जिला मुख्यालय से मात्र 10 किमी दूरी पर बसा हूं मैं
मैं क्योड़क गांव जिला मुख्यालय से दस किमी दूर स्थित हूं। करीब सात किलोमीटर परिधि के क्षेत्र में बसा मैं 700 वर्ष से भी ज्यादा पुराना गांव हूं। मेरे अंतर्गत रहने वाले लोगों की साक्षरता दर 80 प्रतिशत से अधिक है। आबादी 30 हजार से ज्यादा है और 13 हजार के करीब वोटर हैं। मैं अलग-अलग पट्टियों में बंटा हूं। जिले के बड़े गांवों में शुमार हूं। विधानसभा क्षेत्र में जीत के दावेदारों की दिशा-दशा तय करने में मेरी विशेष भूमिका रहती है। आज भी गांव के कई व्यक्ति सत्तासीन पार्टी में बड़े ओहदेदार हैं।
विज्ञापन

नाले तो बनवा दिए सफाई नहीं होती
ग्रामीण श्याम सिंह ने बताया कि नेशनल हाईवे से गांव में प्रवेश करने वाली मुख्य सड़क का निर्माण कर दोनों ओर नाले तो बनवा दिए गए, लेकिन उनमें सफाई का कार्य नहीं हो रहा। गांव में कम्युनिटी सेंटर मुख्य गली में बनाना चाहिए था, लेकिन वह गांव के बाहर श्मशान घाट के पास बना दिया गया, जिसका ग्रामीणों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। गांव में न बस स्टैंड है और न ही मंडी की व्यवस्था है। जो मंडी मुख्य सड़क के पास बनाई गई थी, उसका भी कोई प्रयोग नहीं हो रहा है। सीजन में आढ़तियों और किसानों को फसल की खरीद के लिए ठेके पर खेतों में जमीन लेनी पड़ती है।
नहीं बना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र
ग्रामीण रामपाल ने बताया कि गांव बड़ा भी है और सीएम ने गोद भी ले रखा है। फिर भी गांव में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नहीं बन पाया है। आठ से 10 गांवों के लोगों की स्वास्थ्य सेवाएं केवल पीएचसी के भरोसे हैं। उसमें भी कभी दवाएं पूरी नहीं होती तो कभी डॉक्टर व स्टाफ पूरा नहीं होता। यह समस्या गांव के प्रमुख मुद्दों में से एक है। इसके अलावा सरेआम शराब की बिक्री भी गांव की बड़ी समस्या है।
गांव में नहीं है लाइब्रेरी
गांव के युवा अभिषेक ने बताया कि गांव से रोजाना करीब 500 छात्र-छात्राएं शहर में सरकारी और निजी लाइब्रेरी में पढ़ने के लिए जाती हैं। बड़ा गांव होने के बावजूद शिक्षा स्तर को सुधारने का कोई बड़ा प्रयास नहीं किया जा रहा। गांव में इस बार लाइब्रेरी का निर्माण प्राथमिकता के आधार पर होना चाहिए।
स्टेडियम में नहीं है खेलने का सामान
युवा जोनी ने कहा कि गांव में कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी हैं। खिलाड़ियों के लिए खेल स्टेडियम तो बना है, लेकिन उसमें खेलने के लिए सामान पूरा नहीं है। जब तक पंचायत रही तब तक सामान मिलता रहा, लेकिन पंचायत का कार्यकाल पूरा होने के बाद अभी तक सामान नहीं पहुंचा है। स्टेडियम में बिजली और पीने के पानी को लेकर भी समस्याएं बनी रहती हैं। इस बार समस्याओं का समाधान आवश्यक है।
अधर में लटका है चहारदीवारी का कार्य
गांव निवासी बंटी ने कहा कि गांव में कुछ समय पहले गोशाला तो बन गई, लेकिन उसकी चारदीवारी का कार्य आज भी अधर में लटका हुआ है। ऐसे में कई बार गायें बाहर निकल जाती हैं। सीवरेज व्यवस्था भी सही नहीं है। कई स्थानों से सीवरेज टूटी अवस्था में है, जिससे निकासी का कार्य प्रभावित हो रहा है। इस समस्या का समाधान प्राथमिकता से होना चाहिए।
पंचायत स्तर पर कराए काफी विकास कार्य
गांव के निवर्तमान सरपंच बलकार सिंह ने बताया कि उनके कार्यकाल में पंचायत स्तर पर गांव में काफी विकास कार्य हुए। इनमें गांव से खेतों में जाने वाले रास्तों को पक्का करवाना, ग्राम पंचायत की आय में वृद्धि करना, मत्स्य पालन में गांव के लिए करोड़ों रुपये से तालाब तैयार करना, चौपालों का कायाकल्प करना और सभी सरकारी स्कूलों का सुंदरीकरण आदि कार्य शामिल हैं।
13 उम्मीदवार चुनाव की दौड़ में
गांव क्योड़क में इस समय 13 उम्मीदवार जिला परिषद, ब्लॉक समिति और ग्राम पंचायत का चुनाव लडऩे की दौड़ में हैं। ग्रामीणों के अनुसार गांव के तीन युवाओं ने जिला परिषद चुनाव के लिए प्रचार-प्रसार शुरू कर दिया है। वहीं ब्लॉक समिति के लिए चार व्यक्तियों के नामों की गांव में चर्चा है। इसके अलावा सरपंच पद के लिए फिलहाल छह ग्रामीणों ने जनसंपर्क शुरू किया है। दूसरी ओर ग्रामीणों का ये भी अनुमान है कि नामांकन के समय तक उम्मीदवारों की संख्या और ज्यादा बढ़ सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें