कैथल। हरियाणा की ऐतिहासिक और पौराणिक भूमि पर स्थित क्योड़क गांव एक विशेष पहचान रखता है। यह गांव जिला मुख्यालय से 10 किमी दूर चंडीगढ़-हिसार हाईवे पर बसा है। गांव की पहचान यहां स्थित कोटि-कुट तीर्थ से है। मान्यता है कि महाभारत काल में जब माता कुंती आत्मग्लानी और मानसिक कष्ट से जूझ रही थीं, तब एक ऋषि के परामर्श पर वे इस पावन स्थल पर आईं। उन्होंने यहां स्नान किया और पापों व कष्टों से मुक्ति हासिल की।
धार्मिक मान्यता है कि इस तीर्थ स्थल पर श्रद्धापूर्वक स्नान करने से मनुष्य को एक करोड़ तीर्थों में स्नान करने जितना पुण्य मिलता है और वह कन्या यज्ञ के फल को प्राप्त कर परम पद को प्राप्त करता है। श्रद्धालुओं की अगाध श्रद्धा को देखते हुए इस तीर्थ के बिल्कुल मध्य में माता कुंती की मूर्ति स्थापित की गई है। इस स्थान को सुंदर धाम का रूप दिया गया है। दूर-दूर से लोग माता कुंती के इस धाम के दर्शन करने और पवित्र सरोवर में डुबकी लगाने आते हैं। विशेष अवसरों और त्योहारों पर यहां श्रद्धालुओं का भारी मेला लगता है जिससे पूरा माहौल भक्तिमय हो जाता है। गांव की महत्ता को देखते हुए पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने गांव को गोद भी लिया था।
पशु चराने आए लोगों ने तालाब देख जमाया था डेरा
इस गांव के बसने की कहानी भी बेहद दिलचस्प है। करीब 600 वर्ष पहले यहां से पांच किमी दूर टीक गांव के लोग पास के क्षेत्र क्योड़क में अपने पशु चराने के लिए आया करते थे। उस समय पानी की भारी किल्लत हुआ करती थी। पशु चराते समय लोगों की नजर यहां स्थित विशाल तालाब पर पड़ी। पानी की प्रचुरता और पशुओं के अनुकूल माहौल को देखकर लोगों ने यहीं पर अपना डेरा जमाने का फैसला कर लिया। धीरे-धीरे यह डेरा एक बड़े गांव के रूप में तब्दील हो गया।
30 हजार की आबादी और हाईवे पर बसा
समय के साथ इस गांव का तेजी से विस्तार हुआ। आज यह गांव मुख्य हाईवे पर स्थित है जिसके कारण यहां परिवहन और व्यापारिक गतिविधियां भी काफी बेहतर हैं। वर्तमान में गांव की कुल आबादी लगभग 30 हजार के करीब पहुंच चुकी है। 12 हजार के करीब मतदाता हैं। इतनी बड़ी आबादी होने के बावजूद गांव के लोगों में आज भी वही पुराना भाईचारा और अपनी संस्कृति के प्रति जुड़ाव साफ देखने को मिलता है।
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11 मंदिरों का गांव और अंग्रेजों के जमाने का इतिहास
धार्मिक दृष्टि से गांव बेहद समृद्ध है। पूरे गांव में कुल 11 छोटे-बड़े मंदिर स्थापित हैं, जो ग्रामीणों की गहरी धार्मिक आस्था को दर्शाते हैं। इन मंदिरों में एक भगवान शिव का विशेष मंदिर ऐसा भी है जो अंग्रेजों के जमाने का बना हुआ है। इस प्राचीन मंदिर की वास्तुकला और इतिहास को देखने के लिए भी लोग यहां आते हैं। सुबह-शाम इन 11 मंदिरों में होने वाली आरती से पूरा गांव गुंजायमान रहता है। यह गांव न केवल धार्मिक रूप से बल्कि देशभक्ति के मामले में भी अग्रणी है। गांव में शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने के लिए चार सरकारी स्कूल मौजूद हैं। इस गांव की सबसे अनुकरणीय बात यह है कि इन सभी 4 सरकारी स्कूलों का नाम देश के लिए अपनी जान न्योछावर करने वाले शहीद जवानों के नाम पर रखा गया है।
- पवन ने बताया कि लोक मान्यताओं के अनुसार, जैसे भारतवर्ष में 12 ज्योतिर्लिंग हैं, वैसे ही कुरुक्षेत्र भूमि में पांच प्रमुख महादेव स्थल माने जाते हैं जिनमें से एक इसी क्षेत्र से जुड़ा हुआ है।
- ग्रामीण रामतेज का कहना है कि तीर्थ स्थल पर श्रद्धापूर्वक स्नान करने से मनुष्य को एक करोड़ तीर्थों में स्नान करने जितना पुण्य मिलता है और वह कन्या यज्ञ के फल को प्राप्त करता है।
- रामफल ने बताया कि बुजुर्गों के अनुसार, यह गांव तोमर (तंवर) राजपूतों का एक प्रमुख गढ़ रहा है। गांव में सभी समाज के लोग भाईचारे से रहते हैं। पंचायती और सामाजिक फैसलों में गांव के नेतृत्व का सम्मान रहा है।
- लक्ष्मी कांत ने बताया कि आज के समय में क्योड़क गांव जिले के सबसे बड़े और प्रभावशाली गांवों में गिना जाता है। गांव के महत्व को देखते हुए पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने इस गांव विकसित करने के लिए गोद लिया था।
- ग्रामीण दीपक शर्मा ने बताया कि गांव में लोग सभी भाईचारे से रहते हैं। गांव में लगभग सभी समाज की चौपाल हैं। दुख-सुख में सभी समाज के लोग एक साथ खड़े होते हैं। गांव में धार्मिक आयोजन भी होते रहते हैं।
गांव के बीच में स्थित शहीद भगत सिंह चौक। संवाद
गांव के बीच में स्थित शहीद भगत सिंह चौक। संवाद
गांव के बीच में स्थित शहीद भगत सिंह चौक। संवाद
गांव के बीच में स्थित शहीद भगत सिंह चौक। संवाद
गांव के बीच में स्थित शहीद भगत सिंह चौक। संवाद
गांव के बीच में स्थित शहीद भगत सिंह चौक। संवाद
गांव के बीच में स्थित शहीद भगत सिंह चौक। संवाद