संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। मकर संक्रांति पर भगवान श्री कपिल मुनि का पंचामृत के साथ षोड्श स्नान करवाया गया। कपिल मुनि की पूजा अर्चना करने के पश्चात पुजारी संजय शास्त्री तथा अनिरुद्ध गौतम द्वारा उन्हें वस्त्र धारण करवाए गए। इस अवसर पर
भारी संख्या में मौजूद श्रद्धालुओं ने
कपिल भगवान का चरणामृत पाकर पुण्य की प्राप्ति की।
पूजा अर्चना करने के लिए आए श्रद्धालुओं को पुजारी संजय शास्त्री द्वारा मकर संक्रांति व श्री कपिल मुनि के महत्व को बताया गया।
मकर संक्रांति के दिन श्री कपिल मुनि के पौराणिक तीर्थ में स्नान कर पूजा अर्चना करने से गंगासागर के समान पुण्य प्राप्त होता है। जिस प्रकार श्री कपिल मुनि का मंदिर व तीर्थ गंगासागर में है बिल्कुल उसी तरह का ही मंदिर कलायत में स्थित है। जिसके चलते ही यहां पौराणिक तीर्थ में स्नान कर श्री कपिल जी की पूजा अर्चना करने से वही फल प्राप्त होता है।
मकर संक्रांति के दिन श्री कपिल मुनि का दूध दही, शहद, गंगा जल के साथ षोड्श स्नान करवाकर उनकी विशेष पूजा अर्चना की जाती है। मंदिर में आने वाला हर श्रद्धालु इस दिन श्री कपिल मुनि के सामने घी का दीप जलाकर पूजा अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना करने के साथ मन्नत भी मांगते हैं। मकर संक्राति पर मंदिर में खिचड़ी का प्रसाद भी विशेष तौर पर बनाया गया था। मंदिर में मौजूद श्रद्धालुओं में खिचड़ी के साथ लड्डुओं व फलों का प्रसाद भी वितरित किया गया।
पुजारी गौतम ने बताया कि संक्राति के दिन जिस प्रकार तिल का विशेष महत्व होता है वहीं ठीक इसी प्रकार खिचड़ी दान करने के साथ इसका प्रसाद पाने का भी अपना विशेष महत्व होता है।
लगाई डुबकी ः ठंड के बीच मकर संक्रांति पर श्रद्धालुओं ने पौराणिक तीर्थ में डुबकी लगाई। श्रद्धालुओं द्वारा पौराणिक तीर्थ में डुबकी लगाकर तीर्थ के किनारे भी पूजा अर्चना की जा रही थी।